अमेरिकी बहुराष्ट्रीय बैंकिंग कंपनी Citigroup ने हाल ही में अपने ग्लोबल तकनीकी कार्यबल की पुनर्रचना के तहत चीन में मौजूद लगभग 1,000 तकनीकी नौकरियां भारत के बिजनेस सपोर्ट सेंटर्स में स्थानांतरित कर दी हैं। इस कदम का उद्देश्य कंपनी के वैश्विक संचालन को सरल बनाना और जोखिम प्रबंधन बेहतर करना बताया गया है।
इस नौकरी स्थानांतरण की प्रक्रिया पिछले कुछ महीनों में चरणबद्ध तरीके से पूरी की गई है, जिसके बाद Citigroup के भारत में कर्मचारियों की संख्या लगभग 33,000 हो गई है। कंपनी के भारतीय केंद्र बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों में स्थित हैं।
इस बदलाव के पीछे अमेरिकी सरकार द्वारा H-1B वीजा के लिए नई $100,000 फीस की घोषणा भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है, जिसके बाद वैश्विक बैंक अपने तकनीकी और बैकएंड काम को भारत जैसे कम लागत वाले और दक्ष कर्मी संसाधनों वाले देशों की तरफ मोड़ रहे हैं।
Citigroup की CEO जेन फ्रेजर ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने बैंकिंग उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाने शुरू कर दिए हैं और कम्पनी ने पहले ही विश्वभर के 1,40,000 से अधिक कर्मचारियों को AI टूल्स से लैस किया है। भारत में टीम AI आधारित जटिल कार्यों को संभाल रही है, जिससे तकनीकी कामकाज में अधिक इन्सोर्सिंग हो रही है।
हालांकि चीन में 3,500 तकनीकी नौकरियों में कटौती की गई है, भारत की तकनीकी टीमों को और अधिक रणनीतिक और जटिल जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत आने वाले वर्षों में तकनीकी और वित्तीय सेवाओं के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।