Dollar vs Rupee: 8 साल का टूटा रिकॉर्ड! 1.5% उछला रुपया, जानिए क्या अब FII की होगी वापसी
Dollar vs Rupee: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद रुपये में 8 साल की सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले 1.5 प्रतिशत उछाल ने विदेशी निवेशकों की संभावित वापसी की उम्मीद बढ़ाई है। अब बाजार की नजर RBI और FII फ्लो पर है। जानिए रुपये के उछाल पर एक्सपर्ट की राय।
एक्सपर्ट के मुताबिक, टैरिफ में कटौती से भारतीय बाजारों में FII की वापसी का रास्ता फिर से खुल सकता है।
Dollar vs Rupee: मंगलवार, 3 फरवरी को भारतीय रुपये ने डॉलर के मुकाबले शानदार मजबूती दिखाई। रुपया 90.27 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह रुपये का तीन सप्ताह का उच्च स्तर है। सोमवार को इसका क्लोजिंग लेवल 91.51 था। भारतीय रुपये में करीब 1.5 प्रतिशत की तेज मजबूती दिखी।
बीते 12 सालों में ऐसी तेजी सिर्फ 10 बार दर्ज हुई है। यह उछाल 2014 के बाद से रुपये की तीसरी सबसे बड़ी इंट्राडे तेजी मानी जा रही है, जो इसे शानदार सत्र बनाती है। यह दिसंबर 2018 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है।
इतिहास में कहां खड़ी है यह उछाल
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, रुपये की सबसे बड़ी इंट्राडे तेजी 18 दिसंबर 2018 को 1.62 प्रतिशत रही थी। इसके बाद 11 नवंबर 2022 को 1.51 प्रतिशत की मजबूती आई थी। अब 3 फरवरी 2026 की 1.48 प्रतिशत की तेजी इस लिस्ट में शामिल हो गई है, जो नवंबर 2018 और मई 2019 जैसे बड़े मूव्स से भी ऊपर है।
टैरिफ कट से मिला बड़ा बूस्ट
फॉरेक्स बाजार के जानकारों का कहना है कि रुपये में आई इस तेज मजबूती की सबसे बड़ी वजह भारत-अमेरिका ट्रेड डील है। इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे भारत की ट्रेड पोजीशन मजबूत हुई है। साथ ही, विदेशी निवेशकों के भरोसे को सहारा मिला है।
इंटरबैंक मार्केट में ऐसे रहा कारोबार
इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 90.30 प्रति डॉलर पर खुला था। यह पिछले बंद स्तर 91.49 से करीब 119 पैसे मजबूत था। पूरे दिन बाजार में रुपये की मजबूती बनी रही और आखिर में यह 90.27 के आसपास बंद हुआ।
FII की वापसी की उम्मीद जगी
Finrex Treasury Advisors LLP के हेड ऑफ ट्रेजरी और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक, टैरिफ में कटौती से भारतीय बाजारों में FII की वापसी का रास्ता फिर से खुल सकता है।
उनका कहना है कि 18 प्रतिशत का टैरिफ भारत को बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रखता है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को सीधा फायदा मिल सकता है।
RBI की रणनीति पर टिकी रहेंगी नजरें
भंसाली के अनुसार, अब बाजार की नजर भारतीय रिजर्व बैंक के रुख पर रहेगी। आने वाले सत्रों में RBI को शॉर्ट डॉलर पोजीशंस को संभालना पड़ सकता है, ताकि रुपये की तेजी बहुत ज्यादा न हो और एक्सपोर्ट सेक्टर पर दबाव न पड़े।
ग्लोबल संकेतों से भी मिला सहारा
ग्लोबल स्तर पर भी रुपये को सपोर्ट मिला। डॉलर इंडेक्स 0.20 प्रतिशत गिरकर 97.43 पर आ गया, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी पर दबाव कम हुआ।
वहीं ब्रेंट क्रूड 0.41 प्रतिशत गिरकर 466.03 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे भारत के इंपोर्ट बिल पर दबाव कुछ हद तक घटा।
सोमवार को इक्विटी में बिकवाली
एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, सोमवार 2 फरवरी को FII ने भारतीय शेयर बाजार में 1,832.46 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। लेकिन, यह ट्रेड डील पर मुहर लगने से पहले की बात थी। एक्सपर्ट का मानना है कि डील होने के बाद अब विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम हो सकती है।
आगे कैसी रहेगी रुपये की चाल
कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी और कमोडिटी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, हाल के महीनों में रुपया एशियाई मुद्राओं के मुकाबले कमजोर रहा क्योंकि ट्रेड तनाव के दौरान इसे एक पॉलिसी बफर की तरह इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि महंगाई नियंत्रण में रहने से रुपये की कमजोरी से इंपोर्टेड इंफ्लेशन का बड़ा खतरा नहीं था, इसलिए करेंसी वैल्यूएशन में डिस्काउंट बना रहा।
अनिंद्य बनर्जी के अनुसार, हालिया ट्रेड एग्रीमेंट और टैरिफ को 18 प्रतिशत तक घटाने से रुपये के लिए सीमित लेकिन साफ मजबूती का रास्ता खुला है। हालांकि आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय रिजर्व बैंक किस स्तर पर हस्तक्षेप करता है, क्योंकि निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखना उसकी प्राथमिकता रहेगी।
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