दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलॉन मस्क (Elon Musk) के पास सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर (Twitter) को खरीदने के लिए 46.5 अरब डॉलर का फंड तैयार है। टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के मालिक Elon Musk ने गुरुवार को बताया कि वह Twitter के साथ एक समझौते पर बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि मस्क ने पिछले सप्ताह 54.20 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर ट्विटर के सभी 100 फीसदी शेयर खरीदने और उसे एक निजी कंपनी बनाने की पेशकश की थी। यह पूरी डील करीब 43 अरब डॉलर के करीब बैठती है।
33.5 अरब डॉलर खुद के पास से लगाया
Elon Musk ने बताया कि 46.5 अरब डॉलर के फंड में करीब 33.5 अरब डॉलर उन्होंने अपने तरफ से लगाए हैं। इसमें 21 अरब डॉलर के शेयर और 12.5 अरब डॉलर का मार्जिन लोन शामिल है। वहीं बाकी का 13 अरब डॉलर मार्गन स्टैनली सहित कई बैंकों ने मिलकर मुहैया कराने पर सहमति जताई है।
Elon Musk ने अमेरिकी शेयर बाजारों को भेजी सूचना में बताया कि वह ट्विटर के सभी शेयरों को 54.20 डॉलर के हिसाब से नकद में खरीदने के लिए एक टेंडर प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं। टेंडर प्रस्ताव के जरिए ट्विटर के शेयरहोल्डरों को अपने शेयर बेचने का प्रस्ताव दिया जाएगा।
पहले ही खरीद चुके हैं 9.2% हिस्सेदारी
Elon Musk ने पिछले महीने ही ट्विटर की 9.2 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी और अब वह कंपनी के बाकी के 90.8 फीसदी शेयरों को भी खरीदना चाहते हैं। मस्क अपने टेंडर प्रस्ताव को ट्विटर के बोर्ड के सामने रखने की जगह सीधे शेयरहोल्डरों को सौपेंगे। हालांकि, उन्होंने अभी यह तय नहीं किया है कि वह ऐसा करेंगे या नहीं।
ट्विटर ने नहीं दिया मस्क के ऑफर का जवाब
शेयर बाजार को भेजी सूचना में कहा गया कि ट्विटर ने मस्क के प्रस्ताव पर अभी कोई जवाब नहीं दिया है। इस बीच, ट्विटर के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने पिछले सप्ताह एक ऐसी नीति अपनाई है, जो कंपनी के खरीदने के मस्क के प्रयास को महंगा कर सकती है। इस नीति को कारपोरेट जगत में 'पॉइजन पिल' के नाम से जाना जाता है।
क्या होता है 'पॉइजन पिल' poison
बिजनेस की दुनिया में 'पॉइजन पिल' एक इमरजेंसी उपाय है, जिसका इस्तेमाल कंपनियां सालों से खुद को अनचाहे व्यक्तियों के हाथों में जाने से बचाने के लिए करती है। 'पॉइजन पिल' के प्लान को कई तरह से बनाया जा सकता है। हालांकि सभी का मकसद जबरन अधिग्रहण की प्रक्रिया को रोकना होता है। इसके तहक कंपनी एक शेयरहोल्डर राइट्स प्लान बनाती है, जिससे जरिए बाजार में कंपनी के ढेर सारे शेयर जारी कर दिए जाते हैं। शेयरों की संख्या बढ़ने से कंपनी का अधिग्रहण करना बहुत महंगा हो जाता है और कंपनी को खुद को बचाने में सफल हो जाती है।