मस्क की कंपनी Starlink को भारत में सेवाएं शुरू करने के लिए जल्द मिल सकती है मंजूरी

एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीकॉम मिनिस्ट्री इसी महीने स्टारलिंक के प्रस्ताव पर चर्चा कर सकती है, जिसमें कंपनी को ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटलाइट (GMPCS) सर्विसेज लाइसेंस की मंजूरी दिए जाने की बात है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। हालांकि, आखिरी वक्त में आपत्तियां पेश किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता

अपडेटेड Sep 12, 2023 पर 5:45 PM
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GMPCS के बाद स्टारलिंक को कई सरकारी विभागों और स्पेस मिनिस्ट्री से मंजूरी लेनी होगी।

एलन मस्क ( Elon Musk) की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को भारत में सर्विस शुरू करने के लिए जल्द ही टेलीकॉम मिनिस्ट्री से मंजूरी मिल सकती है। सुरक्षा वजहों से इस सैटेलाइन कंपनी की फाइल कई महीनों तक होम मिनिस्ट्री में अटक गई थी।

एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीकॉम मिनिस्ट्री इसी महीने स्टारलिंक के प्रस्ताव पर चर्चा कर सकती है, जिसमें कंपनी को ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटलाइट (GMPCS) सर्विसेज लाइसेंस की मंजूरी दिए जाने की बात है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। हालांकि, आखिरी वक्त में आपत्तियां पेश किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

GMPCS के बाद स्टारलिंक को कई सरकारी विभागों और स्पेस मिनिस्ट्री से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद कंपनी भारत में अपना ऑपरेशन लॉन्च करने की दिशा में काम कर सकती है। भारत में फिलहाल मुकेश अंबानी की कंपनी जियो (Jio) और सुनील मित्तल की इकाई वन वेब (One Web) के पास GMPCS लाइसेंस है। इसके लिए जियो की पार्टनरशिप लग्जमबर्ग की कंपनी एसईएस (SES) के पास है। जेफ बेजोस (Jeff Bezos) के पास 'क्यूपियर' (Kuiper) नाम से ऐसा ही प्रोजेक्ट है, लेकिन अब तक यह भारत में नहीं आया है।


टेलीकॉम मिनिस्ट्री ने 2021 में स्टारलिंक को उस वक्त फटकार लगाई थी, जब कंपनी ने बिना लाइसेंस के भारत में एडवांस ऑर्डर लेना शुरू किया था। उस वक्त 5,000 से भी ज्यादा सब्सक्राइबर्स ने ऑर्डर दिए थे। स्टारलिंक को भारतीय लोगों से इकट्ठा किए फंड को भी लौटाने का निर्देश दिया गया था। इस साल जून में खबर आई थी कि स्टारलिंक इस बात के लिए लॉबीइंग रही है कि भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम का ऑक्शन नहीं हो। कंपनी का कहना था कि यह प्राकृतिक संसाधन है, जिसे कंपनियों द्वारा शेयर किया जाना चाहिए। कंपनी का कनाह था कि ऑक्शन होने से इस पर भौगोलिक पाबंदियां लागू हो सकती हैं और इससे लागत बढ़ेगी।

दूसरी तरफ, रिलायंस इस बात से सहमत नहीं है और उसने इसके लिए ऑक्शन की मांग की है। उसका कहना है कि सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर्स वॉइस और डेटा सर्विसेज ऑफर कर पारंपरिक टेलीकॉम कंपनियों से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, इसलिए कंपनियों के बीच एक समान स्तर के लिए ऑक्शन होना जरूरी है।

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