दुनिया भर में बैंकिंग संकट के गहराने की चिंता जताई जा रही है। हालांकि यूरोपियन सेंट्रल बैंक (European Central Bank) का मुख्य फोकस अभी भी महंगाई से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने पर बना हुआ है और वह ब्याज दरों में पहले की तरफ बढ़ोतरी पर अड़ा रहा। जबकि कई निवेशकों ने सेंटीमेंट बेहतर होने तक उससे नीतियों में नरमी लाने की अपील की थी। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) ने गुरुवार को इन अपीलों को नजरअंदाज करते हुए अपने मुख्य ब्याज दरों में 0.50% की बढ़ोतरी का ऐलान किया। ECB महंगाई पर काबू पाने के लिए पिछले कुछ समय रिकॉर्ड गति से ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर रहा है। बता दें कि ECB, यूरो जोन के तहत आने वाले यूरोप के 20 देशों का केंद्रीय बैंक है।
इसके साथ ही सेंट्रल बैंक ने अब डिपॉजिट रेट को बढ़ा कर 3 फीसदी कर दिया है, जो साल 2008 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। ECB ने महंगाई दर को 2 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय बैंक ने कहा, "अस्थिरता के उच्च स्तर ने गवर्निंग काउंसिल को दरों से जुड़े फैसले लेने के लिए आंकड़ों पर आधारित नजरिया अपनाने के महत्व की पुष्टि किया है।"
इस बीच यूरोपीय बैंकों के शेयरों में इस हफ्ते तगड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पहले यह गिरावट अमेरिका के सिलिकॉन वैली बैंक के धराशायी होने के बाद आई और फिर क्रेडिट सुइस से जुड़े संकट ने इस गिरावट को और तेज कर दिया।
हालांकि स्विस नेशनल बैंक ने रातोंरात क्रेडिट सुइस को 54 अरब डॉलर का सपोर्ट मुहैया कराके, उसे मौजूदा संकट से निकालने का प्रयास किया है। इससे क्रेडिट सुइस का शेयर आज 20% तक चढ़ गया और इसने बाकी यूरोपीय बैंकों के शेयरों को भी ऊपर ढकेला है।
ECB के लिए प्रमुख चिंता यह है कि ब्याज दरें सहित सभी मॉनिटरी फैसले बैंकिंग सिस्टम के जरिए ही काम करते हैं। ऐसे में एक बड़ा बैंकिंग संकट उसकी नीतियो को अप्रभावी बना सकता है। शायद यही कारण है क ECB ने भविष्य में बढ़ोतरी को लेकर इस बार कोई संकेत नहीं दिया है।