बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी 4 हफ्ते की राहत, SEBI की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच पर नहीं दर्ज होगी एफआईआर

Ex-Sebi Chief Madhabi Puri Buch Gets Relief: सेबी की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज होगी। स्पेशल कोर्ट ने शनिवार को उनके और पांच अन्य ऑफिशियल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। हालांकि फिर ये बॉम्बे हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने इस एफआईआर के आदेश पर चार हफ्ते के लिए रोक लगा दिया। जानिए क्या है पूरा मामला और 4 हफ्ते में क्या होने वाला है?

अपडेटेड Mar 04, 2025 पर 3:07 PM
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Ex-Sebi Chief Madhabi Puri Buch Gets Relief: कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच को बॉम्बे हाईकोर्ट से आज मंगलवार 4 मार्च को बड़ी राहत मिली है। हालांकि यह राहत चार हफ्ते के लिए मिली है।

Ex-Sebi Chief Madhabi Puri Buch Gets Relief: कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच को बॉम्बे हाईकोर्ट से आज मंगलवार 4 मार्च को बड़ी राहत मिली है। हालांकि यह राहत चार हफ्ते के लिए मिली है। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के उस आदेश पर चार हफ्ते के लिए रोक लगा दी है जिसमें माधबी पुरी बुच और पांच अन्य ऑफिशियल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है। यह एफआईआर स्टॉक मार्केट में फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन के आरोप में दर्ज होनी थी लेकिन अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह कहते हुए इस आदेश पर रोक लगा दिया कि ट्रायल कोर्ट का ऑर्डर मैकेनिकल था।

इस कारण बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई रोक

माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस शिवकुमार दीगे (Justice Shivkumar Dige) की सिंगल बेंच ने रोक लगा दिया है। हाईकोर्ट का कहना है कि विशेष अदालत ने मामले में बिना अधिक गहराई से देखे और आरोपियों की भूमिका की जांच किए बिना ही आदेश जारी कर दिया। ऐसे में अगली सुनवाई तक रोक लगाई गई है। इस मामले में शिकायत करने वाले यानी सपन श्रीवास्तव को याचिकाओं के जवाब में अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।


क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 1994 में एक कंपनी की बीएसई पर लिस्टिंग को लेकर की गई धोखाधड़ी और अन्य आरोपों से जुड़ा है। एक मीडिया रिपोर्ट सपन श्रीवास्तव ने बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, नियामकीय उल्लंघनों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शिकायत की थी। इस पर विशेष अदालत ने शनिवार को एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को सेबी की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को कहा था। स्पेशल एसीबी कोर्ट जज शशिकांत एकनाथराव बांगड़ का कहना था कि नियामकीय उल्लंघन और साजिश के स्पष्ट प्रमाण हैं तो इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत है। बता दें कि इस आदेश के एक दिन पहले ही यानी शुक्रवार को माधबी पुरी बुच का सेबी की पहली महिला प्रमुख के तौर पर कार्यकाल पूरा हुआ था।

विशेष अदालत के इस आदेश के खिलाफ माधबी पुरी बुच, सेबी के तीन मौजूदा पूर्णकालिक निदेशकों - अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण जी और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय, बीएसई के एमडी और सीईओ सुंदररामन राममूर्ति और बीएसई के पूर्व अध्यक्ष और पब्लिक इंटेरेस्ट डायरेक्टर प्रमोद अग्रवाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इनका कहना था कि विशेष अदालत का आदेश मनमाना और अवैध था और हाईकोर्ट ने आखिरकार इस आदेश पर चार हफ्ते के लिए रोक लगा दिया।

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