भारत और कनाडा के बीच रिश्ते भले ही सुधर रहे हों, लेकिन इस साल मुक्त व्यापार समझौते यानि कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत फिर से शुरू होने की उम्मीद कम ही है। इसकी वजह है कि भारत सरकार अमेरिका, यूरोपीय संघ और कुछ अन्य देशों के साथ समझौतों को वरीयता दे रही है। वाणिज्य मंत्रालय न्यूजीलैंड, पेरू, चिली, ओमान और कतर के साथ भी जल्द से जल्द FTA साइन करने के लिए बातचीत कर रहा है।
एक सरकारी अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया, "यह रिश्तों में सामान्य गर्मजोशी है; कनाडा के साथ पिछली बातचीत व्यापारिक कारणों से नहीं टूटी थी। वाणिज्य विभाग कई FTA में व्यस्त है, इसलिए कनाडा शायद लिस्ट में टॉप पर न हो। बातचीत के लिए गुंजाइश की जरूरत होती है और इसलिए यह प्राथमिकता का विषय है।"
कब और क्यों रुक गई FTA पर बातचीत
भारत और कनाडा के बीच FTA पर बातचीत 10 साल बाद मार्च 2022 में फिर से शुरू हुई थी। जुलाई 2023 तक 9 राउंड की बातचीत हुई। फिर दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए। वजह थी- कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियां बढ़ना और तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से भारतीय सरकारी एजेंटों के जुड़े होने के सबूतों वाला बयान। इसके बाद सितंबर 2023 के आसपास बातचीत रोक दी गई। इस रोक से पहले दोनों पक्षों को 2023 तक एक अंतरिम मुक्त व्यापार समझौता साइन होने की उम्मीद थी।
जनवरी 2025 में ट्रूडो ने कनाडा के प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफे की घोषणा की। उनके जाने के बाद कनाडा और भारत ने बिगड़े हुए रिश्तों को सुधारने के लिए कदम उठाए हैं। जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर आगे बढ़ने के लिए अर्ली प्रोग्रेस ट्रेड एग्रीमेंट (EPTA) पर रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की जरूरत पर बल दिया। इस मीटिंग के बाद से भारत और कनाडा के रिश्ते सुधरे हैं।
क्या होगा बातचीत का एजेंडा
भारत और कनाडा के बीच ट्रेड 2024-25 में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 8.67 अरब डॉलर हो गया। 13 अक्टूबर को भारत और कनाडा द्विपक्षीय व्यापार और निवेश पर जल्द ही मंत्रिस्तरीय चर्चा शुरू करने पर सहमत हुए। दोनों देश कृषि, विज्ञान और टेक्नोलॉजी, आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस, महत्वपूर्ण खनिजों और एनर्जी पर सहयोग करने, अपने हाई कमीशंस और वाणिज्य दूतावासों में इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटीज को मजबूत करने पर भी राजी हुए। इसके अलावा असैन्य परमाणु सहयोग यानि कि सिविल न्यूक्लियर कोलैबोरेशन भी एजेंडे में है।
एक उद्योग सूत्र का कहना है कि कनाडा के साथ FTA में वक्त लगेगा, साथ ही रिश्तों को बेहतर बनाने में भी वक्त लगेगा। इस साल बातचीत शुरू होने की संभावना कम है क्योंकि यह सरकार की प्रायोरिटी लिस्ट में नहीं है।