पानी की बोतल से लेकर AC तक सब हुआ महंगा, युद्ध के बीच कच्चे माल की किल्लत ने बिगाड़ा आम आदमी का बजट

Supply Disuption Price Hikes: पश्चिम एशिया युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतों में तो 50% तक का उछाल आया है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए पुराने रेट्स पर टिके रहना नामुमकिन हो गया है

अपडेटेड Apr 06, 2026 पर 5:15 PM
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पश्चिम एशिया संकट ने पैकेजिंग इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है

Summer Price Heat: इस बार की गर्मियां केवल तापमान ही नहीं, बल्कि जेब पर पड़ने वाले बोझ के कारण भी पसीने छुड़ाने वाली हैं। ईरान और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अब भारत में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर दिख रहा है। बोतलबंद पानी से लेकर एयर कंडीशनर (AC) बनाने वाली कंपनियों ने कच्चे माल की बढ़ती लागत और इनपुट कॉस्ट के चलते अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं।

कांच से लेकर प्लास्टिक तक हुआ महंगा

पश्चिम एशिया संकट ने पैकेजिंग इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है। बीयर और ठंडे पेय पदार्थों के शौकीनों के लिए आने वाले दिन महंगे हो सकते हैं। ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, कांच की बोतलों और कैन की सप्लाई प्रभावित होने से लागत में 20% का इजाफा हुआ है। कंपनियां अब कैन का आयात करने पर विचार कर रही हैं, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं।


वहीं 'महाराष्ट्र बोतलबंद पानी निर्माता संघ' ने 12 लीटर के बॉक्स पर ₹25 की बढ़ोतरी की घोषणा की है। PET रेजिन और प्लास्टिक बोतलों की कीमत में 50% तक का उछाल देखा गया है।

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'लाहौरी जीरा' जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स ने भी चुनिंदा पैक साइज पर दाम बढ़ा दिए हैं। कंपनियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी लागत के दबाव को कम करने के लिए अनिवार्य थी।

15% तक बढ़ सकते हैं AC के दाम

कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के कारण AC कंपनियों ने भी रेट बढ़ाने का फैसला लिया है। पैनसोनिक चरणबद्ध तरीके से अपनी कीमतों में 12 से 15 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की योजना बना रही है। ब्लू स्टार ने पहले ही कीमतों में 8% का इजाफा कर दिया है और अब कुल 13% तक की बढ़ोतरी की तैयारी में है। गोदरेज ने इस महीने की शुरुआत से ही विभिन्न श्रेणियों में 5 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू कर दी है। कंपनियों का कहना है कि LPG, पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीस्टाइनिन की कम आपूर्ति के कारण उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ रहा है।

बेमौसम बारिश से डिमांड में आई कमी

मार्च के महीने में देश के मध्य और उत्तरी हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश के कारण AC और कूलिंग प्रोडक्ट्स की बिक्री थोड़ी धीमी रही, लेकिन कंपनियां आने वाले महीनों में मजबूत मांग की उम्मीद कर रही हैं। इसी बाबत कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं ताकि गर्मियों के पीक सीजन में मांग को पूरा किया जा सके। कंपनियों का मानना है कि कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी से बढ़ती लागत का पूरा बोझ कम नहीं होगा, लेकिन बाजार में बने रहने के लिए यह जरूरी है।

इनपुट कॉस्ट और सप्लाई चेन का संकट

पश्चिम एशिया युद्ध के कारण केवल तेल ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक निर्माण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और पैकेजिंग में लगने वाले कार्डबोर्ड बॉक्स की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। कुछ कच्चे माल की कीमतों में तो 50% तक का उछाल आया है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए पुराने रेट्स पर टिके रहना नामुमकिन हो गया है।

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