GDP Growth: दिग्गज इनवेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs ने भारत की 2026 की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा दिया है। ब्रोकरेज ने ग्रोथ प्रोजेक्शन 20 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.9% सालाना कर दिया है। इसकी वजह अमेरिका की ओऱ से टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया जाना हैय़
GDP Growth: दिग्गज इनवेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs ने भारत की 2026 की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा दिया है। ब्रोकरेज ने ग्रोथ प्रोजेक्शन 20 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.9% सालाना कर दिया है। इसकी वजह अमेरिका की ओऱ से टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया जाना हैय़
Goldman Sachs का मानना है कि भारतीय आयात पर अमेरिका का प्रभावी टैरिफ रेट अब पहले के 34% के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत अंक कम हो सकता है। हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी साफ किया है कि कंपोनेंट लेवल पर पूरी जानकारी आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।
करंट अकाउंट डेफिसिट को लेकर राहत
बेहतर ट्रेड कंडीशंस को देखते हुए Goldman Sachs ने भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD का अनुमान घटा दिया है। ब्रोकरेज ने 2026 के लिए CAD को GDP के 0.25% कम करते हुए 0.8% पर ला दिया है।
Goldman Sachs ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ में कटौती की घोषणा के बाद यह बदलाव किया गया है। इससे भारत के ट्रेड बैलेंस पर दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है।
रुपये पर दबाव घटा, लेकिन बड़ी तेजी नहीं
रुपये को लेकर Goldman Sachs ज्यादा उत्साहित नहीं है। ब्रोकरेज के मुताबिक, हाल के दिनों में रुपये पर दबाव जरूर कम हुआ है। पिछले हफ्ते यह उभरते बाजारों की करेंसी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा।
लेकिन आगे चलकर रुपये में बड़ी मजबूती की उम्मीद नहीं है। Goldman Sachs का कहना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पूरी होने के बाद अगर पोर्टफोलियो इनफ्लो बढ़ता भी है, तो उसका असर सीमित रह सकता है।
इसकी वजह यह है कि शॉर्ट फॉरवर्ड पोजिशन का धीरे धीरे खत्म होना और RBI का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना है। यह रुपये की तेजी को रोक सकता है।
ब्याज दरों पर RBI का रुख
मौद्रिक नीति को लेकर Goldman Sachs का मानना है कि ब्याज दरों में कटौती का दौर अब खत्म हो चुका है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया 2026 तक रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखेगा। यानी फिलहाल ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिखती।
किन सेक्टरों को मिल सकता है फायदा
Goldman Sachs के मुताबिक, भारत-अमेरिका टैरिफ रीसेट का सबसे ज्यादा फायदा टेक्सटाइल और जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर को मिल सकता है। इन सेक्टरों पर टैरिफ 50% से घटाकर शून्य किए जाने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर 2025 में अमेरिका को टेक्सटाइल और जेम्स-ज्वेलरी का निर्यात घटा था, क्योंकि अगस्त 2025 तक एक्सपोर्टर्स पहले ही ज्यादा शिपमेंट भेज चुके थे।
कृषि आयात पर आंशिक राहत
हालांकि, भारत ने कुछ संवेदनशील उत्पादों को टैरिफ छूट से बाहर रखा है। इनमें जेनेटिकली मॉडिफाइड प्रोडक्ट्स, अनाज और डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
Goldman Sachs का अनुमान है कि अमेरिका से भारत आने वाले करीब 60 से 70 फीसदी कृषि आयात पर शून्य या कम टैरिफ लागू हो सकता है।
अभी और स्पष्टता का इंतजार
कुल मिलाकर, Goldman Sachs का मानना है कि अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाया जाने वाला प्रभावी टैरिफ करीब 20 प्रतिशत अंक तक घट सकता है।
हालांकि, मशीनरी, मेटल्स और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टरों के लिए कंपोनेंट वाइज जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि प्रभावी टैरिफ 15 से 18% के दायरे में रह सकता है, लेकिन पूरी तस्वीर सेक्टर वाइज डिटेल आने के बाद ही साफ होगी।
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