India US Trade Deal: 'अमेरिका से $500 अरब का आयात कोई मुश्किल नहीं', पीयूष गोयल ने बताया कैसे खरीद बढ़ाएगा भारत

India US Trade Deal: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात भारत के लिए आसान है। उन्होंने कहा कि इस आंकड़े कम करके आंका गया है और हमारा अमेरिकी आयात इसके पार भी पहुंच सकता है। गोयल ने यह भी बताया कि भारत का अमेरिका से आयात कैसे बढ़ेगा। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Feb 08, 2026 पर 7:53 PM
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पीयूष गोयल ने कहा कि विमानों और इंजनों के साथ-साथ स्पेयर पार्ट्स की जरूरत भी लगातार बनी रहेगी।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि अगले पांच साल में भारत को अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने में कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने इस आंकड़े को 'बहुत कंजरवेटिव' बताया और कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को देखते हुए यह लक्ष्य कम आंका गया है। हमारा अमेरिका से असल आयात इसके पार भी पहुंच सकता है।

2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचेगी आयात मांग

PTI Videos से बातचीत में गोयल ने कहा कि आने वाले पांच साल में भारत की कुल आयात जरूरत करीब 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इससे अमेरिकी निर्यातकों के लिए बड़े मौके बनेंगे, बशर्ते वे कीमत और गुणवत्ता के मामले में प्रतिस्पर्धी बने रहें।


उन्होंने कहा कि आज भी भारत करीब 300 अरब डॉलर का ऐसा सामान आयात कर रहा है, जो अमेरिका से आ सकता है। यह आयात दुनिया के अलग-अलग देशों से हो रहा है। अगले पांच साल में इसका दायरा और बढ़ेगा। गोयल के मुताबिक, उन्होंने अपने अमेरिकी समकक्षों से साफ कहा है कि भारत में मांग की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रतिस्पर्धा में बने रहना जरूरी होगा।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला फ्रेमवर्क तैयार

भारत और अमेरिका ने शनिवार को द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने की घोषणा की। संयुक्त बयान के अनुसार, भारत ने अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के एनर्जी प्रोडक्ट्स, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल खरीदने की मंशा जताई है।

मौजूदा आयात भी इसी का हिस्सा

गोयल ने साफ किया कि यह 500 अरब डॉलर का आंकड़ा किसी नई शुरुआत की बात नहीं करता। भारत पहले से ही हर साल अमेरिका से 45 से 50 अरब डॉलर का आयात कर रहा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां घरेलू उत्पादन सीमित है।

उन्होंने कहा कि जिन उत्पादों की बात हो रही है, वे उसी सिलसिले की निरंतरता हैं और इसमें वे चीजें भी शामिल हैं, जो भारत पहले से खरीद रहा है। यह टिप्पणी उन्होंने उस सवाल के जवाब में की कि क्या इस आंकड़े में मौजूदा बोइंग विमान ऑर्डर भी शामिल हैं।

एविएशन सेक्टर बनेगा बड़ा ड्राइवर

वाणिज्य मंत्री ने एविएशन सेक्टर को भारत-अमेरिका ट्रेड का सबसे बड़ा ड्राइवर बताया। उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले सालों में बड़ी संख्या में विमान, उनके इंजन और स्पेयर पार्ट्स की जरूरत होगी।

गोयल ने बताया कि अकेले Boeing के पास ही भारत के करीब 50 अरब डॉलर के विमान ऑर्डर पहले से मौजूद हैं। इसके अलावा इंजनों के भी बड़े ऑर्डर दिए जा चुके हैं।

100 अरब डॉलर का एविएशन आयात संभव

पीयूष गोयल ने कहा कि विमानों और इंजनों के साथ-साथ स्पेयर पार्ट्स की जरूरत भी लगातार बनी रहेगी। अगले पांच साल के लिए करीब 80 से 90 अरब डॉलर के ऑर्डर पहले से ही दिए जा चुके हैं, लेकिन असल जरूरत इससे कहीं ज्यादा होगी।

गोयल ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पढ़ा है कि Tata Group और भी विमान ऑर्डर देने की योजना बना रहा है। उनके मुताबिक, सिर्फ एविएशन सेक्टर के लिए ही भारत को 100 अरब डॉलर से ज्यादा का आयात करना पड़ सकता है। यह आंकड़ा तेल, LNG, LPG और कच्चे तेल के आयात के अलावा होगा।

स्टील सेक्टर के लिए कोकिंग कोल की बढ़ती जरूरत

स्टील इंडस्ट्री की बात करते हुए गोयल ने कहा कि भारत जैसे-जैसे 300 मिलियन टन स्टील उत्पादन के लक्ष्य की ओर बढ़ेगा, कोकिंग कोल की मांग तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि सिर्फ कोकिंग कोल के लिए ही भारत को हर साल करीब 30 अरब डॉलर का आयात करना पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी साफ किया कि जिन उत्पादों की बात हो रही है, उनका आयात कोई नई बात नहीं है। यह कांग्रेस और UPA सरकार के समय से होता आ रहा है।

टेक्नोलॉजी और मशीनरी की मांग और बढ़ेगी

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण भारत में खपत लगातार बढ़ रही है। गोयल ने कहा कि इसका सीधा असर एडवांस टेक्नोलॉजी और हाई-एंड उपकरणों की मांग पर पड़ेगा।

उन्होंने बजट में डेटा सेंटर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े ऐलानों का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी क्षेत्रों में हाई-क्वालिटी मशीनरी और टेक्नोलॉजी की जरूरत होगी।

Nvidia चिप्स से लेकर AI मशीनरी तक जरूरत

गोयल ने सवाल उठाया कि AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर्स के लिए जरूरी मशीनरी, ICT प्रोडक्ट्स और NVIDIA के चिप्स आखिर कहां से आएंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका एडवांस टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लीडर है और भारत की जरूरतें आने वाले समय में और बढ़ेंगी।

500 अरब डॉलर का लक्ष्य भी कम आंका गया

अमेरिका को एडवांस टेक्नोलॉजी का ग्लोबल लीडर बताते हुए गोयल ने कहा कि 500 अरब डॉलर का आयात लक्ष्य भारत की भविष्य की जरूरतों को सही तरीके से नहीं दिखाता। उनके मुताबिक, सालाना 100 अरब डॉलर का आयात आंकड़ा भी बहुत कंजरवेटिव है।

उन्होंने कहा कि भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ऐसे देश के लिए अमेरिका से आयात की यह रकम बेहद मामूली मानी जानी चाहिए।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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