2025 में 32,000 नौकरियां...H-1B वीजा पर सख्त नियमों के बीच अमेरिकी कंपनियां भारत में बढ़ा रहे हायरिंग

मनीकंट्रोल को मिले स्पेशलिस्ट स्टाफिंग फर्म Xpheno के डेटा के मुताबिक, यह हायरिंग पिछले साल के मुकाबले 18 फीसदी ज्यादा है, जिससे भारत में इन कंपनियों की कुल वर्कफोर्स बढ़कर 2.14 लाख हो गई है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि भारतीय टेक टैलेंट की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे उभरते सेक्टर में

अपडेटेड Dec 26, 2025 पर 3:01 PM
Story continues below Advertisement
अमेरिका में लाखों की संख्या में भारतीय वर्कर्स H-1B वीजा के जरिए जॉब कर रहे हैं।

अमेरिका में लाखों की संख्या में भारतीय वर्कर्स H-1B वीजा के जरिए जॉब कर रहे हैं। वहीं अमेरिका में काम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए एच-1बी वर्क वीजा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया

नए नियम के तहत अब एच-1बी वीजा के लिए प्रक्रिया पूरी तरह बदल दी गई है। अब तक वीजा पाने के लिए रैंडम लॉटरी सिस्टम लागू था, लेकिन इसे खत्म कर दिया गया है। H-1B वीजा नियमों के बदलाव के बीच अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों ने भारत में अपनी हायरिंग तेज कर दी है। Meta, Amazon, Apple, Microsoft, Netflix और Alphabet ने 2025 में भारत में मिलकर 32,000 से ज्यादा नए कर्मचारियों को नौकरी दी है।

मनीकंट्रोल को मिले स्पेशलिस्ट स्टाफिंग फर्म Xpheno के डेटा के मुताबिक, यह हायरिंग पिछले साल के मुकाबले 18 फीसदी ज्यादा है, जिससे भारत में इन कंपनियों की कुल वर्कफोर्स बढ़कर 2.14 लाख हो गई है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि भारतीय टेक टैलेंट की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे उभरते सेक्टर में। Xpheno के को-फाउंडर कमल करंथ ने कहा कि 2025 के लिए इन कंपनियों में कर्मचारियों की शुद्ध बढ़ोतरी पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा रही है।

किन रोल्स की ज्यादा मांग ?


Xpheno और TeamLease Digital के आंकड़ों के मुताबिक, FAAMNG ग्रुप की कंपनियों में इस समय करीब 3,000 से 5,000 एक्टिव जॉब ओपनिंग हैं। TeamLease Digital की CEO नीति शर्मा ने बताया कि कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़ने के बावजूद अमेरिकी टेक कंपनियां अब सामान्य पदों पर नहीं, बल्कि चुनिंदा और खास स्किल वाले रोल्स के लिए ही हायरिंग कर रही हैं। साल 2025 में इन कंपनियों का फोकस खास तौर पर AI/ML ऑप्स, डेटा इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और गवर्नेंस जैसे नए डिजिटल स्किल्स पर रहा। TeamLease के एनालिसिस के अनुसार, भले ही कुल कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी सीमित हो, लेकिन इन खास रोल्स की मांग में करीब 25 से 30 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।

नीति शर्मा के मुताबिक, इस समय कंपनियों की मांग पुराने सपोर्ट रोल्स की बजाय हाई-वैल्यू और खास टेक स्किल्स पर ज़्यादा है। यह दिखाता है कि टेक कंपनियां अब इनोवेशन और नई उभरती तकनीकों को अपनाने की दिशा में अपनी रणनीति बदल रही हैं। वहीं, करंथ ने बताया कि AI को बड़े स्तर पर अपनाने का पूरा असर अभी हायरिंग प्रक्रिया में साफ तौर पर नहीं दिखा है, क्योंकि कंपनियां फिलहाल सीधे AI से जुड़े पदों से ज्यादा ऐसे प्रोफेशनल्स को रख रही हैं, जिनकी स्किल्स AI की क्षमताओं को मजबूत कर सकें। उनका कहना है कि AI की वजह से हायरिंग पैटर्न में होने वाले बड़े बदलाव अगले दो से तीन साल में साफ नजर आने लगेंगे।

इन आंकड़ों के पीछे क्या वजह है?

साल 2025 में बड़ी टेक कंपनियों ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और भारत में अपनी टीम को मजबूत करने के लिए निवेश तेज कर दिया। Microsoft, Google, Amazon जैसी कंपनियों ने देश में टेक्नोलॉजी और टैलेंट पर पहले से कहीं ज्यादा ध्यान दिया। इसी दौरान Perplexity AI और OpenAI जैसी नई AI कंपनियां भी भारत को अपने बड़े कंज्यूमर मार्केट के रूप में देखने लगी हैं। इसी वजह से ये कंपनियां भारत में ऑफिस और डेटा सेंटर खोलने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।

भारत के प्रति यह सकारात्मक रुझान ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका में H-1B वीज़ा के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। H-1B एक अहम नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा है, जिसके जरिए अमेरिकी टेक कंपनियां विदेशों से स्किल्ड प्रोफेशनल्स को नौकरी पर रखती हैं। हर साल जारी होने वाले H-1B वीज़ा में से करीब 70 से 75 फीसदी भारतीय आवेदकों को मिलते हैं, जिससे भारत ग्लोबल टेक टैलेंट का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।

लेकिन 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने नए वीज़ा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की फीस लागू कर दी और एक नया लॉटरी सिस्टम भी शुरू किया। इस सिस्टम में अब ज्यादा स्किल वाले और ज्यादा सैलरी पाने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। करंथ ने बताया कि कर्मचारियों की कुल संख्या में जो बढ़ोतरी हुई है, वह काफी हद तक पहले से रुकी हुई मांग की वजह से थी। हालांकि, सेवाओं पर लगने वाले संभावित टैरिफ, H-1B वीज़ा की बढ़ी फीस से टैलेंट की लागत में इजाफा और संभावित HIRE एक्ट जैसे फैक्टर अब इन कंपनियों को भारत को लेकर अपनी टैलेंट रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल कंपनियां सावधानी के साथ कदम उठा रही हैं, लेकिन आने वाले समय में भारत में सही और जरूरी स्किल वाले टैलेंट की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। भारत में लोकल टैलेंट को हायर करने से कंपनियों को स्किल के साथ-साथ लागत के मामले में भी साफ फायदा मिलता है, जो दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा किफायती साबित होता है।

बड़ी टेक कंपनियां भारत में कितना निवेश कर रही हैं?

बड़ी टेक कंपनियां भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने और ग्लोबल टैलेंट तक आसान पहुंच बनाने के लिए तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं। अक्टूबर–दिसंबर तिमाही के दौरान Google ने आंध्र प्रदेश के Visakhapatnam में एक बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब बनाने के लिए 15 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया। इस प्रोजेक्ट से अगले पांच सालों में एक लाख से ज्यादा नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

वहीं Microsoft ने भारत में क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, लोगों को नई टेक स्किल्स सिखाने और डिजिटल क्षमताएं बढ़ाने के लिए 17.5 बिलियन डॉलर निवेश करने की बात कही है। Amazon भी भारत में बड़ा दांव लगा रही है। कंपनी अगले पांच सालों में 35 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी, जिससे क्विक कॉमर्स से लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग तक उसके कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। अमेज़न को उम्मीद है कि इससे साल 2030 तक भारत में करीब 10 लाख नई नौकरियां बनेंगी। अब तक किए गए ये निवेश भारत में टेक कंपनियों के सबसे बड़े ऐलानों में शामिल हैं और यह साफ दिखाते हैं कि भारत उनके लिए रणनीतिक रूप से कितना अहम बन चुका है।

इसके अलावा, अगस्त 2025 में OpenAI ने ऐलान किया कि वह साल के अंत तक नई दिल्ली में अपना पहला भारत कार्यालय खोलेगा। इससे पहले Microsoft ने हैदराबाद में करीब 2.65 लाख वर्ग फुट की प्रीमियम ऑफिस स्पेस लीज़ पर ली, जिसका हर महीने का किराया लगभग 5.4 करोड़ रुपये है। वहीं जुलाई में Apple ने बेंगलुरु में ऑफिस स्पेस के लिए 10 साल की लीज़ पर 1,010 करोड़ रुपये से ज्यादा का समझौता किया।

साल की शुरुआत में Meta ने भी बेंगलुरु में नया ऑफिस खोलने की घोषणा की और इंजीनियरिंग व प्रोडक्ट से जुड़े पदों के लिए हायरिंग शुरू की। इसके बाद अप्रैल में Google ने बेंगलुरु में अपने नए कैंपस ‘अनंता’ को पेश किया, जो दुनिया में गूगल के सबसे बड़े ऑफिस परिसरों में से एक माना जा रहा है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।