कंपनियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार उन पर कंप्लायंस का बोझ घटाने जा रही है। सरकार ने यूनियन बजट 2025 में इस बारे में कई ऐलान किए थे। सरकार अब उन्हें जल्द लागू करने जा रही है। सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर मनीकंट्रोल को इस बारे में बताया। सरकार ने ईज ऑफ बिजनेस 2.0 के प्रस्तावों का लागू करने पर फोकस बढ़ा दिया है। यह 2014 में शुरू की गई रिफॉर्म्स की प्रक्रिया की अगली कड़ी है।
रेगुलेटरी रिफॉर्म्स के लिए जल्द बनेगी कमेटी
रेगुलेटरी रिफॉर्म्स (Regulatory Reforms) के लिए जल्द एक हाई-लेवल कमेटी बनाने की तैयारी है। यह कमेटी नॉन-फाइनेंशियल सेक्टर के मौजूदा नियमों को आसान बनाने को लेकर अपने सुझाव देगी। इसके अलावा विदेशी निवेश के नियमों को भी आसान बनाया जाएगा। सरकार जन विश्वास के दूसरे एडिशन को जल्द लागू करने जा रही है। इसके तहत नियमों के उल्लंघन के छोटे मामलों को अपराध की कैटेगरी से बाहर किया जाएगा।
नियम आसान होने से कई सेक्टर्स को होगा फायदा
सरकारी अधिकारी ने बताया, "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2.0, नियमों के उल्लंघन के मामलों को अपराध की कैटेगरी से बाहर करने और टैक्स प्रोसेसेज को आसान बनाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। यह नियमों का आसान बनाने का सही समय है। रेगुलेटरी रिफॉर्म्स पर कमेटी जल्द बनेगी। इससे कई क्षेत्रों में डीरेगुलेशन पर फैसले लेने में देर नहीं होगी।" नियमों को आसान बनाने से इंडस्ट्री के कई सेगेमेंट्स को फायदा होगा। खासकर उन सेक्टर को मदद मिलेगी, जिन पर ट्रंप के टैरिफ का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।
यूनियन बजट में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाने के कई उपाय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंडिया पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया है। 27 अगस्त से यह दोगुना यानी 50 फीसदी हो जाएगा। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को इस टैरिफ से छूट हासिल है। इस साल 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करने वक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाने के लिए कई उपायों का ऐलान किया था। इनमें सर्टिफिकेशन के नियमों पर विचार के लिए एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव शामिल था। इसके अलावा नॉन-फाइनेंशियल सेक्टर को लाइसेंस और परमिशन के लिए भी एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव था। गठन के बाद कमेटी एक साल के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।
इस साल शुरू हो जाएगा राज्यों का इनवेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स
यूनियन बजट में राज्यों के लिए इनवेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स बनाने का भी प्रस्ताव पेश किया गया था। इसके 2025 में शुरू हो जाने की उम्मीद है। इससे राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। सरकार फाइनेंशियल सेक्टर के विकास के लिए फाइनेंशियल स्टैबिलिीट एंड डेवलपमेंट काउंसिल के तहत मजबूत फ्रेमवर्क बनाना चाहती है। अधिकारी ने बताया कि चूंकि वैश्विक माहौल अनिश्चित है, जिससे हम जिन चीजों को निश्चित बना सकते हैं, उन्हें बनाएंगे।
100 से ज्यादा प्रावधान अपराध की कैटेगरी से बाहर होंगे
जन विश्वास बिल 2.0 लागू करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इससे तहत अलग-अलग कानूनों से जुड़े 100 से ज्यादा प्रावधानों को अपराध की कैटेगरी से बाहर कर दिया जाएगा। सरकार ने 18 अगस्त को लोकसभा में इस विधेयक को पेश किया था। इसे जल्द संसद की प्रवर समिति को भेजे जाने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा कि सरकार पॉलिसी मेकिंग, डीरेगुलेशन और कंप्लायंस घटाने जैसे आसान उपायों पर पहले फोकस करना चाहत है।