सरकार इंडियन फार्मा कंपनियों के हित में एक बडा कदम उठा सकती है। सरकार दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ रॉ मैटेरियल के न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) तय करने पर विचार कर रही है। खासकर उन दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले रॉ मैटेरियल का एमआईपी तय हो सकता है, जिनका उत्पादन प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत होता है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
इस प्लान पर कई मंत्रालयों के बीच बातचीत जारी
सरकार के इस कदम से उन फार्मा कंपनियों को काफी मदद मिलेगी, जो सरकार की पीएलआई स्कीम के तहत इंडिया में बल्क ड्रग्स के उत्पादन के लिए बड़ा निवेश कर रही हैं। हालांकि, सरकार का यह प्लान अभी शुरुआती अवस्था में है। सूत्र ने कहा, "इस प्लान पर बातचीत चल रही है। इस बातचीत में डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स, प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (पीएमओ), मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस और इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हैं।"
शुरुआत में कुछ खास रॉ मैटेरियल का MIP तय होगा
सरकार शुरुआत में Penicillin-G (PEN-G) और Clavulanic Acid जैसे जरूरी एक्टिव फार्मास्युटिकल्स एनग्रेडिएट्ंस (API) की मैन्युफैक्चरिंग को सुरक्षा प्रदान करना चाहती है। अभी इन रॉ मैटेरियल का चीन से बड़ी मात्रा में इंपोर्ट होता है। एंटिबायोटिक के प्रोडक्शन के लिए ये जरूरी रॉ मैटेरियल्स हैं। इंडस्ट्री के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के कहना है कि चीन के सप्लायर्स अपने रॉ मैटेरियल की कीमतें काफी कम रख रहे हैं। इससे रॉ मैटेरियल बनाने वाली इंडियन कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। खासकर उन कंपनियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, जो पीएलआई स्कीम के तहत रॉ मैटेरियल का उत्पादन कर रही हैं।
पीएलआई स्कीम के तहत उत्पादित API को होगा फायदा
इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि ऐसे कम से कम 8-10 प्रमुख रॉ मैटेरियल्स हैं, जिनका उत्पादन इंडिया में पीएलआई स्कीम के तहत हो रहा है और जिन्हें चीन से सस्ते आयात के कारण कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है। सरकार के सीनियर अधिकारी ने बताया कि MIP का मकसद इंडियन मैन्युफैक्चरर्स को उत्पादन का एक समान मौका प्रदान करना है। ध्यान में रखने वाली बात है कि पीएलआई स्कीम के तहत दवाओं के कुछ प्रमुख रॉ मैटेरियल के उत्पादन में अच्छी सफलता हासिल हुई है। लेकिन, चीन से सस्ते आयात से इंडिया में उत्पादित रॉ मैटेरियल को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।