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इंडियन फार्मा कंपनियों के हित में सरकार उठा सकती है बड़ा कदम, चीन से एपीआई के सस्ते आयात पर लगेगा अंकुश

सरकार दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ रॉ मैटेरियल के न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) तय करने पर विचार कर रही है। खासकर उन दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले रॉ मैटेरियल का एमआईपी तय हो सकता है, जिनका उत्पादन प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत होता है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jul 23, 2025 पर 10:39 PM
इंडियन फार्मा कंपनियों के हित में सरकार उठा सकती है बड़ा कदम, चीन से एपीआई के सस्ते आयात पर लगेगा अंकुश
ऐसे कम से कम 8-10 प्रमुख रॉ मैटेरियल्स हैं, जिनका उत्पादन इंडिया में पीएलआई स्कीम के तहत हो रहा है और जिन्हें चीन से सस्ते आयात के कारण कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार इंडियन फार्मा कंपनियों के हित में एक बडा कदम उठा सकती है। सरकार दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ रॉ मैटेरियल के न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) तय करने पर विचार कर रही है। खासकर उन दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले रॉ मैटेरियल का एमआईपी तय हो सकता है, जिनका उत्पादन प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत होता है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

इस प्लान पर कई मंत्रालयों के बीच बातचीत जारी

सरकार के इस कदम से उन फार्मा कंपनियों को काफी मदद मिलेगी, जो सरकार की पीएलआई स्कीम के तहत इंडिया में बल्क ड्रग्स के उत्पादन के लिए बड़ा निवेश कर रही हैं। हालांकि, सरकार का यह प्लान अभी शुरुआती अवस्था में है। सूत्र ने कहा, "इस प्लान पर बातचीत चल रही है। इस बातचीत में डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स, प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (पीएमओ), मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस और इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हैं।"

शुरुआत में कुछ खास रॉ मैटेरियल का MIP तय होगा

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