केंद्र सरकार ने बीते 6 जुलाई को देश के प्रमुख एडिबल ऑयल एसोसिएशन के साथ बैठक में उन्हें खाने वाले तेल (Edible Oil) के दामों में तत्काल प्रभाव से 15 रुपये की कटौती करने का निर्देश दिया है। सरकार ने यह निर्देश ऐसे समय में दिया है, जब विदेशों से मंगाए जाने वाले एडिबल ऑयल की कीमतें पिछले कुछ समय में घटी है।
डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक, "केंद्र ने यह भी सलाह दिया कि निर्माताओं और रिफाइनर की तरफ से डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए भी कीमत तुरंत घटाए जाने की जरूरत है ताकि कीमतों में गिरावट किसी भी तरह से कम न हो।"
बयान में आगे कहा गया, "सरकार की तरफ से इस बात पर भी जोर दिया गया कि मैन्युफैक्चरर्स या रिफाइनर्स की तरफ से जब भी डिस्ट्रीब्यूटर के लिए कीमतों को घटाए जाए, तो उसका लाभ ग्राहकों तक पास होना चाहिए। यानी ग्राहकों के लिए उनती कीमत कम होनी चाहिए।"
इसके अलावा, जिन कंपनियों ने अपनी कीमतें कम नहीं की हैं और उनकी कीमतें अन्य ब्रांडों की तुलना में अधिक हैं, उन्हें सरकार की तरफ से तुरंत अपने एडिबल ऑयल के दाम घटाने को कहा गया है। बैठक में प्राइस डेटा कलेक्शन, एडिबल ऑयल्स तेलों पर कंट्रोल्स आदेश और तेलों की पैकेजिंग जैसे अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
बता दें कि केंद्र सरकार ने कीमतें कम करने के लिए एडिबल ऑयल्स के कुछ खास शिपमेंट्स पर इंपोर्ट्स ड्यूटी हटाई थी और इंडस्ट्री को इसका लाभ कंज्यूमर्स को पास करने को कहा था। पिछले महीने, कई एडिबल ऑयल कंपनियों ने अपने तेल के दाम में 10 से 15 रुपये लीटर की कटौती की थी।
खाने-पीने की वस्तुओं और फ्यूल की कीमतों में तेजी ने भारत के रिटेल इंफ्लेशन को हाल के महीनों में काफी ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके चलते आरबीआई को मॉनिटरी पॉलिसी को कड़ा करने जैसे कदम उठाने पड़े। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी एडिबल ऑयल विदेशों से इंपोर्ट करता है।
'धारा' ब्रांड नेम से एडिबल ऑयल बेचनी वाली मदर डेरी ने गुरुवार 7 जुलाई को सोयाबीन और राइस ब्रैन ऑयल्स के दाम में 14 रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान किया था।