LPG के बाद अब जरूरी दवाओं पर महंगाई की मार! 20% तक दाम बढ़ाने की तैयारी, जानें कौन सी दवाएं होंगी महंगी

Essential Drug Prices Hike: दवा बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर पेट्रोकेमिकल उत्पाद का प्रयोग होता हैं जो खाड़ी देशों से आते है। युद्ध की वजह से इनकी कीमतें बढ़ गई हैं और सप्लाई रुक गई है। दवा कंपनियों का कहना है कि लागत इतनी बढ़ गई है कि अब पुराने रेट पर दवा बनाना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

अपडेटेड Apr 16, 2026 पर 4:12 PM
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युद्ध के कारण दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है

Essential Drug Prices Hike: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब आपकी दवाइयों के बिल पर भी पड़ने वाला है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन टूटने की वजह से सरकार जरूरी दवाओं की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत की अस्थाई बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। इसमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं और एंटीबायोटिक्स भी शामिल हैं।

दवाओं के दाम बढ़ाना क्यों जरूरी हुआ?

फार्मा कंपनियों का कहना है कि दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वेंट्स यानी कच्चे माल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। ज्यादातर कच्चे माल पेट्रोकेमिकल उत्पाद होते हैं जो खाड़ी देशों से आते हैं। युद्ध की वजह से इनकी कीमतें बढ़ गई हैं और सप्लाई रुक गई है। दवा कंपनियों का कहना है कि लागत इतनी बढ़ गई है कि अब पुराने रेट पर दवा बनाना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। अगर कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, तो मार्केट में दवाओं की किल्लत हो सकती है।


कौन सी दवाएं होंगी महंगी?

यह बढ़ोतरी 'प्राइस कंट्रोल' के तहत आने वाली दवाओं पर लागू हो सकती है:

कैंसर की दवाएं: गंभीर बीमारियों के इलाज में काम आने वाले इंजेक्शन और गोलियां।

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एंटीबायोटिक्स: संक्रमण रोकने वाली जरूरी दवाएं।

इंजेक्शन: अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले जीवन रक्षक इंजेक्शन।

अस्थाई होगी यह राहत

सरकार इस बढ़ोतरी को एक 'शॉर्ट-टर्म' उपाय के तौर पर देख रही है। चर्चा है कि यह बढ़ोतरी कम से कम तीन महीने के लिए लागू की जा सकती है। जैसे ही खाड़ी देशों से सप्लाई सामान्य होगी और कच्चे माल के दाम गिरेंगे, दवाओं की कीमतें फिर से पुराने स्तर पर ले आई जाएंगी। वैसे कुछ कंपनियों ने 50% तक दाम बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सरकार केवल 10-20% की 'कैलिब्रेटेड' बढ़ोतरी के पक्ष में है।

कंपनियों के सामने 'स्टॉक' की चुनौती

कंपनियों के पास सॉल्वेंट्स का बड़ा स्टॉक रखने की भी सीमा है क्योंकि ये केमिकल काफी ज्वलनशील और असुरक्षित होते हैं। सरकार लोकहित में असाधारण परिस्थितियों का हवाला देकर कीमतों में बदलाव कर सकती है। एक बड़ी चुनौती यह है कि जब कीमतें वापस कम की जाएंगी, तो महंगे दाम पर बने पुराने स्टॉक का क्या होगा। इस पर अभी स्पष्टता आनी बाकी है।

'ऑर्गेनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया' (OPPI) और 'इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस' (IPA) जैसे बड़े संगठनों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। उनका तर्क है कि सप्लाई चेन को चालू रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है।

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