फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में एक्सिस बैंक (Axis Bank) के MD और CEO अमिताभ चौधरी का सालाना सैलरी पैकेज 9.75 करोड़ रुपये रहा। बैंक की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, चौधरी के पैकेज में 4.4 करोड़ रुपये की बैसिक सैलरी, 1.4 करोड़ की सुविधाएं और पिछले वर्षों के वैरिएबल पे शामिल हैं।
पिछले तीन फाइनेंशियल ईयर में चौधरी की सालाना सैलरी 7.62 करोड़ रुपये थी। पिछले वित्त वर्ष में एक्सिस बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव आनंद का सालाना पैकेज 6.4 करोड़ रुपये रहा, जिसमें बैसिक सैलरी 2.9 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा, 34.3 लाख की अतिरिक्त सुविधाएं और वैरिएबल पे आदि शामिल थे।
अतिरिक्त सुविधाओं में घर, बिजली, पानी, फर्नीचर, क्लब फीस, पर्सनल एक्सिडेंट इंश्योरेंस, लोन, कार और फोन, मेडिकल रीइंबर्समेंट, यात्रा और ठहरने से जुड़े भत्ते आदि शामिल हैं। एक्सिस बैंक के मुताबिक, आनंद और चौधरी, दोनों को फाइनेंशिय ईयर 2022 के लिए 369,014 और 248,783 स्टॉक ऑप्शन दिए गए, जिसके लिए रिजर्व बैंक (RBI) से फाइनेंशियल ईयर 2023 में मंजूरी मिली। स्टॉक ऑप्शन 725.90 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से दिए गए।
अगर तुलनात्मक तरीके से बात करें, तो HDFC बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन को फाइनेंशियल ईयर 2022-24 में सालाना पैकेज के तौर पर 10.5 करोड़ रुपये मिले। HDFC बैंक की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2022 में जगदीशन की सैलरी 6.51 करोड़ रुपये थी।
जगदीशन के पैकेज में 2.82 करोड़ रुपये की बेसिक सैलरी, 3.3 करोड़ के भत्ते और सुविधाएं और 3.63 करोड़ रुपये के परफॉर्मेंस बोनस के अलावा कई और चीजें शामिल थीं। इसी तरह, HDFC Bank के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर कैजाद भरुचा का सालाना पैकेज 10 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 2.7 करोड़ की बेसिक सैलरी, 4.3 करोड़ के भत्ते और अन्य सुविधाए और 2.2 करोड़ का बोनस आदि शामिल हैं।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन दिनेश खारा को फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में 37 लाख की सैलरी मिली, जो पिछले साल की सैलरी से 7.5 पर्सेंट ज्यादा है। स्टेट बैंक की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, खारा की बेसिक सैलरी 27 लाख रुपये रही, जबकि उन्हें 9.99 लाख रुपये का महंगाई भत्ता मिला। इससे पिछले फाइनेंशियल ईयर में खारा की सैलरी 34.42 लाख रुपये थी।
सरकारी और प्राइवेट बैंकों के टॉप बैंकर्स की सैलरी में अंतर को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। आम तौर पर प्राइवेट बैंकों के आला अफसरों को सरकारी बैंकों के अपने समकक्षों के मुकाबले काफी ज्यादा सैलरी मिलती है।