IDBI बैंक के निजीकरण और IBC में रिफॉर्म्स पर होगा नई सरकार का फोकस

IDBI Bank के विनिवेश की प्रक्रिया लंबे समय से जारी है। इसमें सरकार और LIC में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं। बैंकर्स का कहना है कि इस प्रक्रिया के अगले वित्त वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है। उधर, नई सरकार IBC में रिफॉर्म्स कर इसे और इफेक्टिव बनाने की कोशिश करेगी

अपडेटेड May 30, 2024 पर 3:11 PM
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सरकार और LIC आईडीबीआई बैंक में करीब 61 फीसदी हिस्सेदारी बेच रहे हैं।

केंद्र में बनने वाली नई सरकार बैंकिंग सेक्टर में बड़े रिफॉर्म्स करेगी। इसमें आईडीबीआई बैंक में विनिवेश और इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) में बदलाव शामिल होंगे। बैंकर्स ने यह कहा है। एक सरकारी बैंक के एग्जिक्यूटिव ने कहा कि लंबे समय से आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की कोशिश जारी है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 इस प्रोसेस के पूरा हो जाने की संभावना है। RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर चंदन सिन्हा ने बताया कि FY25 में आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने पर नई सरकार का फोकस हो सकता है। बैंकर्स का यह भी कहना है कि आईबीसी को मजबूत बनाने वाले रिफॉर्म्स पर भी नई सरकार का जोर हो सकता है।

IBC में सुधार की जरूरत

एक प्राइवेट बैंक के सीनियर अफसर ने कहा, "आईबीसी (IBC) से बैंकों की रिकवरी की कोशिश को मजबूती मिली है। लेकिन, अभी इसमें सुधार करने की गुंजाइश बाकी है।" डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सेक्रेटरी तुहिन कांत पांडेय ने 4 फरवरी को मीडिया से बातचीत में कहा था कि सरकार आईडीबीआई बैंक में स्ट्रेटेजिक सेल अगले वित्त वर्ष में पूरा कर लेगी।


आईडीबीआई बैंक में विनिवेश की प्रक्रिया जारी

उन्होंने कहा था कि आईडीबीआई बैंक में विनिवेश की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। एक बार रेगुलेटरी क्लियरेंस मिल जाने के बाद फाइनेंशियल बिड्स आमंत्रित किए जाएंगे। सरकार और LIC आईडीबीआई बैंक में करीब 61 फीसदी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इसके लिए खरीदारों से अक्टूबर 2022 में बिड्स आमंत्रित किए गए थे। जनवरी 2023 में DIPAM ने कहा था कि उसे आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी के प्रस्ताव पर कई एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मिले हैं। बिडर्स को दो तरह के एप्रूव लेने पड़ते हैं। पहला होम मिनिस्ट्री से लेना पड़ता है जो सिक्योरिटी क्लियरेंस के लिए होता है और दूसरा RBI से फिट एंड प्रॉपर का क्लियरेंस होता है।

संसद ने 2016 को आईबीसी कोड को मंजूरी दी थी

संसद ने 2016 में आईबीसी को मंजूरी दी थी। इसका मकसद इनसॉल्वेंसी प्रोसेस में रिफॉर्म था, जिसकी जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। आईबीसी कोड का मकसद बैंकरप्सी प्रोसिडिंग्स को आसान और तेज बनाना था। इसके लिए बॉरोओर्स और क्रेडिटेटर्स के बीच बातचीत के जरिए प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई। आईबीसी कोड से बॉरोअर्स और लेंडर्स के बीच गतिरोध दूर कर इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिली है।

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रिजॉल्यूशन में लगने वाला समय घटा है

लेकिन, रिजॉल्यूशन प्रोसेस अब भी सुस्त है। इसमें कानूनी मसलों, असंतुष्ट क्रेडिटर्स और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर का हाथ है। FY24 में आईबीसी के जरिए 32 फीसदी रिकवरी हुई। रिजॉल्यूशन में लगने वाला समय 863 से घटकर 330 दिन हो गया है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि आईबीसी में सुधार करने की जरूरत है।

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