IIP growth: भारत के कोर सेक्टर की ग्रोथ सितंबर 2025 में घटकर 3 प्रतिशत पर आ गई, जबकि अगस्त में यह 6.5 प्रतिशत थी। यह गिरावट मुख्य रूप से रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, नेचुरल गैस और क्रूड ऑयल के कमजोर प्रदर्शन से आई। वहीं, स्टील और सीमेंट ने अच्छी बढ़त दिखाई। ये आंकड़े वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से सामने आए हैं।
आठ कोर इंडस्ट्रीज में कोयला, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल है। ये इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का 40 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं।
स्टील आगे, ऊर्जा क्षेत्र पीछे
स्टील उत्पादन ने ग्रोथ को संभाला और सालाना आधार पर 14.1 प्रतिशत बढ़ा, अगस्त में 13.6 प्रतिशत की वृद्धि के बाद। यह मजबूत कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड की वजह से हुआ। सीमेंट उत्पादन भी 5.3 प्रतिशत बढ़ा, जो हाउसिंग और रियल एस्टेट सेक्टर की स्थिर गतिविधि को दिखाता है।
लेकिन ऊर्जा से जुड़े उद्योग कमजोर रहे। रिफाइनरी उत्पादन 3.7 प्रतिशत घटा, जबकि नेचुरल गैस और क्रूड ऑयल का उत्पादन क्रमशः 3.8 और 1.3 प्रतिशत कम हुआ। इससे भारत के हाइड्रोकार्बन सेक्टर में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहा।
कोयला उत्पादन अगस्त में 11.4 प्रतिशत बढ़ा था। लेकिन, सितंबर में 1.2 प्रतिशत घटा। इसका कारण हाई बेस इफेक्ट और मानसून बताए गए हैं।
उर्वरक और बिजली में मामूली बढ़त
उर्वरक उत्पादन 1.6 प्रतिशत बढ़ा, जो प्री-रबी सीजन की स्टॉकिंग का असर है। वहीं, बिजली उत्पादन 2.1 प्रतिशत बढ़ा, जो अगस्त में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि से धीमा रहा।
FY26 की पहली छमाही में कोर सेक्टर की औसत वृद्धि 2.9 प्रतिशत रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 4.3 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि औद्योगिक गतिविधियां अभी भी बढ़ रही हैं। लेकिन, वैश्विक मांग की अनिश्चितता और अलग-अलग सेक्टरों में रिकवरी की असमानता के कारण ग्रोथ की रफ्तार धीमी हुई है।