लंबे समय के बाद आखिरकार आईएलएंडएफएस (IL&FS) ग्रुप ने अपने रोड इंफ्रा इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (Road InvIT) को बंद करने के लिए तैयारी लगभग पूरी कर ली है। मनीकंट्रोल को सूत्रों के हवाले से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक इस हफ्ते बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पाइस इसका ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल हो सकता है। आईएलएंडएफएस ने दिसंबर 2020 में सेबी के पास रोडस्टार इंफ्रा इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (Roadstar Infra Investment Trust) के नाम से एक इंफ्रा इनवेस्टमेंट ट्रस्ट को रजिस्टर किया था।
ट्रस्ट के बंद होने का क्या है मतलब
सूत्र के मुताबिक अलग-अलग अथॉरिटीज से कई मंजूरी लेने के चलते इस काम में लंबा समय लग गया। मूल योजना में इसके तहत 9-10 एसेट्स लाने थे लेकिन अब महज 6 ही रोड एसेट्स इसके तहत हैं। इनकी एंटरप्राइज वैल्यू करीब 8500-9000 करोड़ रुपये की है। इनके लेंडर्स को इंफ्रा इनवेस्टमेंट ट्रस्ट की यूनिट अलॉट की जाएगी और फिर इन पर जो टोल वसूल होगा, वह इनकी रेगुलेर इनकम होगी। सूत्र ने बताया कि सेबी ने InvIT की यूनिट्स को लिस्ट करने के लिए 31 मार्च, 2024 तक की समय दिया था। इस प्रक्रिया के लिए सेबी से कई छूट की जरूरत थी, जो पिछले हफ्ते मिली और अब ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस इस हफ्ते दाखिल हो जाएगा। इसके बंद होने से IL&FS को अपने बकाए के एक बड़े हिस्से को चुकाने में मदद मिलेगी।
IL&FS ग्रुप पर कितना है कर्ज
आईएलएंडएफएस ग्रुप वर्ष 2018 में ढह गया था और इसके चलते देश के फाइनेंशियल सर्विसेज सिस्टम के लिए लिक्विडिटी की दिक्कतें खड़ी हो गई थीं। इस पर 1 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज था। बाद में इस ग्रुप को अक्टूबर 2018 में सरकार ने दिग्गज बैंकर उदय कोटक की अगुवाई में बोर्ड बनाकर ट्रैक पर लाने के लिए सौंप दिया। 30 सितंबर 2023 तक इसने एसेट्स के मोनेटाइजेशन, बैंकों के ऑटो डेबिट्स और कर्ज चुकता कर 35,650 करोड़ रुपये का कर्ज चुका दिया। ग्रुप के मुताबिक 14 कंपनियों के बीच आपसी लेन-देन के जरिए 10 हजार करोड़ रुपये का पेमेंट किया गया।
इन सब तरीकों के जरिए IL&FS ने 61 हजार करोड़ रुपये के अपने अनुमानित डेट रिजॉल्यूशन टारगेट के आधे से अधिक लक्ष्य को पूरा कर लिया है। ग्रुप ने मुंबई में स्थित अपना आईकॉनिक हेडक्वॉर्टर बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स ब्रुकफील्ड को मार्च 2022 में 1080 करोड़ रुपये में बेचा। इसके अलावा ओएनजीसी त्रिपुरा पावर कंपनी की 26 फीसदी हिस्सेदारी 1227 करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया को बेच दी।