India-US Interim Trade Deal: भारत के लिए 18% के कम टैरिफ समेत और क्या फायदे, बदले में अमेरिका को क्या मिलेगा

India-US Interim Trade Deal: अमेरिका, भारत से आने वाले विमान और विमान के पुर्जों पर सेक्शन 232 स्टाइल के टैरिफ वापस लेगा। अगर कोई भी पक्ष बाद में टैरिफ बदलता है, तो दूसरा पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं पर फिर से विचार कर सकता है

अपडेटेड Feb 07, 2026 पर 4:38 PM
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अमेरिकी टैरिफ में बदलाव भारतीय मूल के सामानों पर तुरंत लागू होता है।

भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क पेश किया है। यह एक पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) से पहले एक शुरुआती कदम है। मुख्य नतीजा यह है: अमेरिका भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं भारत अमेरिकी निर्यात के लिए बड़े पैमाने पर टैरिफ में कमी करने और रेगुलेटरी मोर्चे पर आसानी के लिए प्रतिबद्ध है। यह फाइनल डील नहीं है। लेकिन यह सेक्टर-स्तर पर लेन-देन को पक्का करता है, और एक व्यापक BTA के लिए रास्ता तैयार करता है।

मुख्य लेन-देन

भारत ने खोला: अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कृषि उत्पादों की एक बड़ी रेंज पर नए या कम टैरिफ, जिसमें पशु चारे और मेवे से लेकर फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट शामिल हैं।


अमेरिका की ओर से राहत: भारतीय निर्यात पर एक समान 18 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ, जिसमें अंतरिम सौदा पूरा होने के बाद कुछ चुनिंदा उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह से हटाने का रास्ता है।

किन भारतीय निर्यातों को फायदा होगा

अमेरिकी टैरिफ में बदलाव भारतीय मूल के सामानों पर तुरंत लागू होता है। इन सामानों में शामिल हैं:

कपड़ा और परिधान यानि कि टेक्सटाइल और अपैरल, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, घर की सजावट का सामान, हस्तशिल्प उत्पाद, और चुनिंदा मशीनरी। अंतरिम समझौते के पूरा होने पर जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और हीरे, और एयरक्राफ्ट के पुर्जों सहित कई प्रकार की चीजों पर टैरिफ जीरो हो जाएगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा टैरिफ का क्या होगा

अमेरिका, भारत से आने वाले विमान और विमान के पुर्जों पर सेक्शन 232 स्टाइल के टैरिफ वापस लेगा। ये टैरिफ एल्यूमीनियम, स्टील और तांबे से जुड़े पुराने सरकारी आदेशों के तहत लगाए गए थे। इसके बदले में भारत ने ऑटो कंपोनेंट्स के लिए तरजीही टैरिफ-दर कोटा और फार्मास्यूटिकल्स पर बातचीत का रास्ता सिक्योर किया है। यह अमेरिकी जांच पर निर्भर है।

भारत लंबे समय से चली आ रही इन अमेरिकी शिकायतों को करेगा दूर

  • मेडिकल डिवाइसेज में प्राइस और रेगुलेटरी बाधाओं को कम करना
  • ICT उत्पादों के लिए प्रतिबंधात्मक आयात लाइसेंसिंग को हटाना
  • 6 महीने के अंदर यह रिव्यू करना कि क्या भारतीय बाजार पहुंच के लिए अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानकों को स्वीकार किया जा सकता है
  • अमेरिकी कृषि आयात में नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करना

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डिजिटल ट्रेड और टेक सप्लाई चेन

यह फ्रेमवर्क दोनों देशों को इन बातों के लिए प्रतिबद्ध करता है:

  • भेदभाव वाली डिजिटल ट्रेड प्रैक्टिस को खत्म करना
  • BTA में महत्वाकांक्षी डिजिटल ट्रेड नियमों के लिए एक रास्ता बनाना
  • डेटा सेंटर, GPU और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर सहयोग को गहरा करना
  • एक्सपोर्ट कंट्रोल, इनवेस्टमेंट स्क्रीनिंग और सप्लाई चेन सुरक्षा पर ज्यादा करीब से तालमेल बिठाना

इसके अलावा दोनों देश ओरिजिन के नियम तय करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि फायदा मुख्य रूप से भारत और अमेरिका को मिले, न कि तीसरे देशों को। अगर कोई भी पक्ष बाद में टैरिफ बदलता है, तो दूसरा पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं पर फिर से विचार कर सकता है। भारत ने 5 सालों में एनर्जी, एयरक्राफ्ट, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स, कीमती धातुओं और कोकिंग कोल सहित 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने का इरादा जताया है।

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