India-US Trade Deal: भारत–अमेरिका के बीच जो कारोबारी समझौता हुआ है, उससे राजनीतिक रूप से संवेदनशील कृषि क्षेत्र को अलग रखा गया है। सीएनबीसी-टीवी18 ने यह खुलासा सरकारी सूत्रों के हवाले से किया है। सूत्रों के मुताबिक चावल, गेहूं, सोया और मक्का जैसे अनाज को इससे बाहर रखा गया है और साथ ही ट्रेड डील से चीनी और डेयरी प्रोडक्ट्स भी बाहर हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि भारतीय किसान और डेयरी वाले बाहरी झटकों से सुरक्षित रहें। सरकार लंबे समय से कृषि और डेयरी को ‘रेड-लाइन’ सेक्टर मानती आई है, क्योंकि गांवों में इनसे जुड़े रोजगार का दायरा बहुत बड़ा है और छोटे उत्पादकों को भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी आयात के सामने खोलने से राजनीतिक खतरे भी जुड़े हैं। अधिकारियों के मुताबिक न सिर्फ अमेरिका के साथ, बल्कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ भी पहले इन्हीं मुद्दों पर बातचीत अटक रही थी। हालांकि अब डील हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के कई अधिकारियों ने दावा किया था कि कारोबारी समझौते के तहत भारत ने अपने कृषि क्षेत्र को खोलने पर सहमति जताई है। हालांकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया है कि दोनों देशों के बीच हुए नए कारोबारी डील के तहत अमेरिका से भारत $50 हजार करोड़ के सामान खरीदेगा। इस सौदे को अहम पहलुओं को लेकर भारतीय कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि इस कारोबारी सौदे से आयात और निर्यात में तेजी आएगी।
$50 हजार करोड़ के सौदे का पूरा ब्रेकअप
यहां भारत और अमेरिका के बीच हुए $50 हजार करोड़ के कारोबारी सौदे का पूरा ब्रेकअप दिया जा रहा है-
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि बोईंग के पास पहले ही $70-80 हजार करोड़ के जहाज का ऑर्डर्स दिया जा चुका है और अब इससे जुड़े कंपोनेंट्स को मिलाकर टोटल वैल्यू $10 हजार करोड़ के पार पहुंच जाएगी। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल का कहना है कि भारत पहले से अमेरिका से $30 हजार करोड़ के सामान आयात करता है और जैसे-जैसे इकॉनमी बढ़ेगी तो मांग में तेजी की उम्मीद है। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत ने अमेरिका से तेल, गैस, जहाज, लैपटॉप, स्मार्टफोन और डेटा सेंटर इक्विपमेंट्स जैसी चीजें खरीदने की बात कही हैं और ये वे चीजें हैं जिन्हें पहले से ही कई देशों से आयात किया जाता रहा है और इन्हें लेकर कोई छूट भी नहीं है।
कॉमर्स मिनिस्ट्री का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी सौदे की पहली किश्त तैयार है और कुछ ही दिनों में इसे लेकर दोनों पक्ष ज्वाइंट स्टेटमेंट पर साइन हो सकते हैं। एक फॉर्मल एग्रीमेंट भी तैयार किया जा रहा है जिस पर मार्च के मध्य तक साइन होने की संभावना है। इसमें किसी भी देश ने निवेश की बात नहीं कही है।