India-EU Trade Deal: वाइन, ऑलिव ऑयल, चॉकलेट होंगे सस्ते; ये सेक्टर रहेंगे पूरी तरह सुरक्षित
India-EU Trade Deal: भारत-EU ट्रेड डील से भारतीय बाजार में कुछ यूरोपीय फूड प्रोडक्ट्स सस्ते हो सकते हैं, लेकिन सभी सेक्टर नहीं खुलेंगे। कौन-से प्रोडक्ट्स को राहत मिली है और किन कृषि क्षेत्रों को जानबूझकर सुरक्षित रखा गया है, पूरी तस्वीर समझिए।
बीफ, चिकन मीट, चावल और चीनी जैसे उत्पादों पर किसी भी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी जाएगी।
India-EU Trade Deal: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत भारत कई यूरोपीय एग्री-फूड प्रोडक्ट्स पर भारी टैरिफ घटाने जा रहा है। इसमें वाइन, ऑलिव ऑयल और प्रोसेस्ड फूड जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। हालांकि, सरकार ने राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील कृषि सेक्टरों को इस समझौते से बाहर रखा है।
EU के आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, यह डील उन एग्री-फूड प्रोडक्ट्स को टारगेट करती है जिन पर भारत में औसतन 36% से ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी लगती थी। यानी बाजार को धीरे-धीरे खोला जा रहा है, लेकिन जरूरी सेक्टरों की सुरक्षा भी की जा रही है।
कौन-कौन से प्रोडक्ट होंगे सस्ते
FTA के तहत भारत ने EU से आने वाले कुछ चुनिंदा कृषि और खाद्य उत्पादों पर बड़ी टैरिफ कटौती का वादा किया है।
EU की वाइन पर लगने वाला 150% इंपोर्ट टैरिफ डील लागू होते ही घटकर 75% हो जाएगा। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से और कम किया जाएगा, जो आगे चलकर करीब 20% तक आ सकता है।
ऑलिव ऑयल पर अभी 45% तक इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। इस डील के तहत अगले पांच साल में यह टैरिफ पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
ब्रेड, कन्फेक्शनरी और अन्य प्रोसेस्ड एग्री-फूड प्रोडक्ट्स पर लगने वाला 50% तक का टैरिफ भी हटाया जाएगा।
इन रियायतों के बाद यूरोपीय वाइन, स्पिरिट्स, बीयर, ऑलिव ऑयल और प्रोसेस्ड फूड भारतीय बाजार में पहले के मुकाबले ज्यादा सस्ते और प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं।
कौन-से सेक्टर रहेंगे पूरी तरह सुरक्षित
सरकार ने कुछ कृषि उत्पादों को जानबूझकर इस FTA से बाहर रखा है। बीफ, चिकन मीट, चावल और चीनी जैसे उत्पादों पर किसी भी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी जाएगी। इन सेक्टरों में देश के करोड़ों किसानों और छोटे उत्पादकों की आजीविका जुड़ी हुई है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों को खोलने से घरेलू उत्पादन और कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
फूड सेफ्टी नियमों में कोई बदलाव नहीं
EU की फैक्टशीट में साफ कहा गया है कि इस ट्रेड डील के तहत आने वाले सभी इंपोर्ट्स पर EU के सख्त हेल्थ और फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड पहले की तरह लागू रहेंगे। इन नियमों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
जियोग्राफिकल इंडिकेशन पर अलग बातचीत
भारत और EU के बीच जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) को लेकर अलग से बातचीत चल रही है। इसका मकसद यह है कि यूरोप के पारंपरिक फूड और कृषि उत्पादों को भारत में बेहतर पहचान और कानूनी सुरक्षा मिल सके, ताकि नकली या नकल किए गए प्रोडक्ट्स पर रोक लगाई जा सके।
EU ने क्यों बताया इसे ऐतिहासिक डील
EU का कहना है कि यह समझौता करीब दो अरब लोगों के बाजार को आपस में जोड़ता है। अब तक बेहद ऊंचे टैरिफ की वजह से यूरोपीय एग्री-फूड प्रोडक्ट्स भारत में सीमित मात्रा में पहुंच पाते थे।
इस डील के बाद EU के वाइन, स्पिरिट्स, बीयर, ऑलिव ऑयल और कन्फेक्शनरी जैसे प्रोडक्ट्स को तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार में खास पहुंच मिलेगी। साथ ही EU ने यह भी साफ किया है कि संवेदनशील उत्पादों और फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स से किसी तरह का समझौता नहीं किया गया है।