मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत अब अपनी व्यापार नीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। सरकार खाड़ी देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है, ताकि इंपोर्ट बिल की लागत और बाहरी झटकों के असर को कम किया जा सके।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल और दूसरी जरूरी सामानों के आयात पर पड़ने वाले भूराजनीतिक उतार-चढ़ाव के असर को सीमित करना है। भारत अपनी क्रूड ऑयल और नैचुरल गैस की जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। ऐसे में भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी सीधे देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।
यह पहल मुख्य रूप से खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के साथ लागू हो सकती है, जिसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन आते हैं। भारत के कुल क्रूड ऑयल इंपोर्ट का करीब 28% हिस्सा इन्हीं देशों से आता है। इसमें सऊदी अरब और यूएई की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।
कच्चे तेल की कीमतों में हाल के महीनों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जो लगभग 70 डॉलर से लेकर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। भारत अपनी लगभग 85% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, ऐसे में कीमतों में यह उतार-चढ़ाव सीधे आयात बिल, व्यापार घाटे और महंगाई पर असर डालता है।
इसके अलावा, रुपये में कमजोरी भी आयात को और महंगा बना रही है। ऐसे में स्थानीय करेंसी में व्यापार से एक्सचेंज रेट के जोखिम को कम किया जा सकता है।
डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल डॉलर की उपलब्धता को लेकर कोई संकट नहीं है, लेकिन यह कदम लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। स्थानीय करेंसी में व्यापार से लेनदेन सीधे रुपये और संबंधित देश की करेंसी में होगा। इससे डॉलर के जरिए होने वाले अतिरिक्त खर्च और जोखिम से बचा जा सकेगा।
UAE मॉडल को अपनाने की तैयारी
भारत इस दिशा में पहले ही संयुक्त अरब अमीरात के साथ सफल मॉडल अपना चुका है। 2022 में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) हुआ था, जिसके बाद 2023 में लोकल करेंसी सेटमेंट (LCS) व्यवस्था लागू की गई।
इस व्यवस्था के तहत व्यापार सीधे भारतीय रुपये और यूएई दिरहम में किया जाता है, जिससे ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम होती है और मुद्रा जोखिम घटता है।
FTA बातचीत के साथ आगे बढ़ेगी पहल
अधिकारियों के अनुसार, GCC देशों के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वार्ताओं के साथ ही इस स्थानीय मुद्रा ढांचे पर भी चर्चा की जाएगी। हालांकि, वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण इस समझौते की पहली औपचारिक बातचीत 2026 के दूसरे हिस्से में शुरू होने की संभावना है।
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