गर्मी से पहले बिजली की बढ़ती मांग और सरकार की नीतियों से जुड़े संकेतों के बीच बाजार में कुछ सेक्टर्स में जोरदार हलचल देखने को मिल रही है। बुधवार के कारोबार में पावर और शुगर सेक्टर के कई शेयरों में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई। पावर स्टॉक्स को बढ़ती ऊर्जा मांग से सपोर्ट मिला, जबकि शुगर कंपनियों के शेयर ICRA की रिपोर्ट और निर्यात से जुड़ी खबरों के बाद चढ़े। इन दोनों सेक्टर्स में बढ़ते वॉल्यूम ने निवेशकों की दिलचस्पी को भी साफ दिखाया।
गर्मी के मौसम से पहले देश में बिजली की बढ़ती मांग के बीच 18 मार्च को पावर सेक्टर के कई शेयरों में तेज खरीदारी देखने को मिली। इंट्राडे कारोबार में Jaiprakash Power, Inox Wind, Siemens Energy India और Reliance Power जैसे स्टॉक्स में बढ़े हुए वॉल्यूम के साथ तेजी आई। शुरुआती कारोबार में Nifty Energy इंडेक्स भी करीब 0.68 प्रतिशत चढ़कर 36,226 के स्तर तक पहुंच गया था।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता करीब 5,20,511 मेगावॉट है। FY26 में फरवरी तक देश की ऊर्जा मांग 15,59,936 मेगावॉट रही, जबकि सप्लाई लगभग उतनी ही यानी 15,59,482 मेगावॉट रही। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाली गर्मी, LPG संकट के कारण घरों में इंडक्शन जैसे इलेक्ट्रिक उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल और पश्चिम एशिया संकट की वजह से ऊर्जा सेक्टर की मांग बढ़ रही है। इससे पावर स्टॉक्स में दिलचस्पी बढ़ी है।
स्टॉक्स की बात करें तो Jaiprakash Power इंट्राडे में 11 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा। वहीं, Inox Wind, Siemens Energy India और Reliance Power में करीब 3 प्रतिशत के आसपास तेजी देखी गई। वहीं GE Vernova T&D India भी लगभग 2.7 प्रतिशत तक चढ़ा। बढ़ते ट्रेडिंग वॉल्यूम और ऊर्जा मांग के बेहतर आउटलुक के कारण निवेशकों की इन पावर स्टॉक्स में खरीदारी बढ़ी है।
शुगर कंपनियों के शेयरों में 18 मार्च को लगातार दूसरे दिन खरीदारी देखने को मिली। इंट्राडे में Sakthi Sugars, Rana Sugars, Dhampur Sugar, Bajaj Hindusthan, EID Parry और Balrampur Chini जैसे स्टॉक्स 5 प्रतिशत तक चढ़े। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA की रिपोर्ट के बाद शुगर सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्राजील से अधिक सप्लाई के कारण अंतरराष्ट्रीय शुगर कीमतों में तेज गिरावट आई है। वहीं, भारत में मांग और सप्लाई की स्थिति संतुलित बनी हुई है। फरवरी 2026 में कच्ची चीनी की कीमत करीब $313 प्रति टन रही, जो फरवरी 2025 के $445 प्रति टन से काफी कम है। एनालिस्टों का मानना है कि वैश्विक कीमतों में गिरावट से भारतीय कंपनियों के मार्जिन बेहतर हो सकते हैं।
इस सेक्टर को सरकार के फैसलों से भी सपोर्ट मिला है। सरकार ने 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए 87,587 टन अतिरिक्त चीनी निर्यात की मंजूरी दी है। इससे पहले सरकार 1.5 मिलियन टन निर्यात की अनुमति दे चुकी थी। फरवरी में 5 लाख टन का अतिरिक्त कोटा भी दिया गया था। शुगर कंपनियों ने सरकार से एथेनॉल ब्लेंडिंग को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाने की मांग भी की है। इससे सेक्टर के आउटलुक को लेकर उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।