IIP ग्रोथ में दिखी सुस्ती, जनवरी में घटकर 4.8 प्रतिशत पर आई; मई से बदलेगा बेस ईयर

IIP Growth: जनवरी 2026 में IIP ग्रोथ घटकर 4.8 प्रतिशत रह गई, जो दिसंबर के 7.8 प्रतिशत से कम है। मैन्युफैक्चरिंग और बिजली सेक्टर ने सहारा दिया। सरकार मई 2026 से IIP की नई सीरीज 2022-23 बेस ईयर के साथ जारी करेगी।

अपडेटेड Mar 02, 2026 पर 6:09 PM
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सरकार ने GDP और IIP जैसे प्रमुख आर्थिक सूचकांकों की बेस ईयर बदलने का फैसला किया है।

भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी IIP में जनवरी 2026 में 4.8 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई। दिसंबर 2025 में यह ग्रोथ 7.8 प्रतिशत थी, यानी रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन ग्रोथ बरकरार है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस बढ़त में मैन्युफैक्चरिंग और बिजली सेक्टर की अहम भूमिका रही।

जनवरी में कितना रहा इंडेक्स

जनवरी 2026 में जनरल इंडेक्स 169.4 पर पहुंच गया, जो पिछले साल जनवरी 2025 में 161.6 था। इससे साफ है कि औद्योगिक गतिविधियों में कुल मिलाकर विस्तार जारी है। मैन्युफैक्चरिंग और बिजली ने संभाला मोर्चा


जनवरी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 4.8 प्रतिशत की ग्रोथ रही। वहीं बिजली उत्पादन 5.1 प्रतिशत बढ़ा। माइनिंग सेक्टर भी पीछे नहीं रहा। इसमें 4.3 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। जनवरी में मैन्युफैक्चरिंग का इंडेक्स 167.2, माइनिंग का 157.2 और बिजली का 212.1 रहा।

23 में से 14 में ग्रोथ

मैन्युफैक्चरिंग के भीतर 23 में से 14 उद्योग समूहों में सकारात्मक वृद्धि देखी गई। ‘बेसिक मेटल्स’ सेगमेंट में 13.2 प्रतिशत की सबसे ज्यादा ग्रोथ दर्ज हुई। ‘मोटर व्हीकल, ट्रेलर और सेमी ट्रेलर’ सेगमेंट 10.9 प्रतिशत बढ़ा। ‘अन्य नॉन मेटालिक मिनरल प्रोडक्ट्स’ में 9.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही।

बेसिक मेटल्स में अलॉय स्टील फ्लैट प्रोडक्ट्स और एमएस स्लैब्स की मांग ने रफ्तार दी। ऑटो सेगमेंट में ऑटो कंपोनेंट्स और कमर्शियल व्हीकल्स की अच्छी मांग रही। वहीं नॉन मेटालिक मिनरल प्रोडक्ट्स में सीमेंट और सीमेंट क्लिंकर का योगदान रहा।

IIP की बेस ईयर बदलेगी

सरकार ने GDP और IIP जैसे प्रमुख आर्थिक सूचकांकों की बेस ईयर बदलने का फैसला किया है। IIP की नई सीरीज 2022-23 को बेस ईयर मानकर तैयार की जाएगी और इसे मई 2026 में जारी किया जाएगा।

इसके अलावा, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI का बेस भी 2024 किया जाएगा। कुल मिलाकर, जनवरी के आंकड़े दिखाते हैं कि औद्योगिक क्षेत्र में रफ्तार बनी हुई है, भले ही दिसंबर की तुलना में ग्रोथ थोड़ी धीमी हुई हो।

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