2026 में भारत तोड़ देगा FDI के सभी रिकॉर्ड! मेगा डील्स और मजबूत फंडामेंटल्स बनेंगे बड़ी वजह
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए नया साल 2026 एक मजबूत साल साबित हो सकता है। मजबूत मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल्स, अरबों डॉलर के बड़े निवेश ऐलान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार और निवेश से जुड़े नए व्यापार समझौते आने वाले साल में भारत को ग्लोबल निवेशकों के लिए और आकर्षक बना सकते हैं
India FDI: भारत में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश मॉरीशस और सिंगापुर से आता है
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए नया साल 2026 एक मजबूत साल साबित हो सकता है। मजबूत मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल्स, अरबों डॉलर के बड़े निवेश ऐलान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार और निवेश से जुड़े नए व्यापार समझौते आने वाले साल में भारत को ग्लोबल निवेशकों के लिए और आकर्षक बना सकते हैं।
सरकार भारत को निवेशकों के लिए आकर्षक और भरोसेमंद डेस्टिनेशन बनाए रखने के लिए FDI नीति की लगातार समीक्षा करती है। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन एंड इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) ने इस साल FDI बढ़ाने को लेकर तमाम स्टेकहोल्डर्स के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। नवंबर में कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भी निवेश प्रक्रियाओं को तेज, सरल और प्रभावी बनाने के उपायों इंडस्ट्री जगत से विचार-विमर्श किया था।
निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियां, बेहतर रिटर्न की संभावना, कुशल मानव संसाधन, अनुपालन बोझ में कमी, छोटे उद्योग-संबंधी अपराधों का अपराधीकरण खत्म करना और तेज मंजूरी प्रक्रियाएं ऐसे अहम कारण हैं, जो ग्लोबल लेवल पर अनिश्चितताओं के बावजूद विदेशी निवेशकों का भरोसा भारत पर बनाए हुए हैं।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा FDI
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में कुल FDI 80.5 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। वहीं जनवरी से अक्टूबर 2025 के दौरान कुल विदेशी निवेश 60 अरब डॉलर से अधिक रहा। DPIIT सचिव Amardeep Singh Bhatia ने कहा कि पिछले 11 सालों में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के चलते भारत ने ऐतिहासिक निवेश आकर्षित किया है। उनके अनुसार, “2024-25 में FDI 80.62 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई पर पहुंचा है और हमें उम्मीद है कि 2026 में यह आंकड़ा इससे भी आगे निकल सकता है।”
EFTA के साथ समझौते से बड़ी उम्मीदें
भारत को यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते से भी बड़ी उम्मीदें हैं। चार देशों वाले EFTA के साथ हुए इस समझौते के तहत अगले 15 सालों में भारत में 100 अरब डॉलर के एफडीआई का वादा किया है। यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ और उसी दिन स्विट्जरलैंड की हेल्थकेयर कंपनी रोश फार्मा ने भारत में अगले पांच साल में 1.5 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 17,000 करोड़ रुपये) निवेश का ऐलान किया था।
EFTA में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। इसी तरह, न्यूजीलैंड के साथ हुए व्यापार समझौते के तहत भी 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई है, जिसे 2026 में लागू किया जाना है।
ग्लोबल रिपोर्ट्स भी भारत के पक्ष में
संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD की वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2025 के अनुसार, 2024 में ग्लोबल एफडीआई 11 प्रतिशत घटकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर रह गया, लेकिन भारत और एशिया के कई हिस्सों में निवेश गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। विकसित देशों में एफडीआई 22 फीसदी घटा, लेकिन विकासशील देशों में निवेश लगभग स्थिर रहा।
टेक और मैन्युफैक्चरिंग में बड़े दांव
2025 में कई ग्लोबल कंपनियों ने भारत में बड़े निवेश ऐलान किए हैं। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला ने 2030 तक भारत में 17.5 अरब डॉलर निवेश करने का ऐलान किया है, जिससे एआई से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा। एमेजॉन अगले 5 सालों में 35 अरब डॉलर और गूगल 15 अरब डॉलर का निवेश भारत में AI हब बनाने के लिए करेगा।
इसके अलावा Apple भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है और साउथ कोरिया की दिग्गज कंपनी सैमसंग भी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विस्तार पर काम कर रहा है। स्टील सेक्टर में आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया 2026 तक कलर-कोटेड स्टील क्षमता बढ़ाने की तैयारी में है।
एक्सपर्ट्स की राय?
डेलॉइट इंडिया की इकोनॉमिस्ट रुमकी मजूमदार का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत अपने आर्थिक रिश्तों को डायवर्सिफाई कर रहा है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में लॉन्गटर्म निवेश बढ़ेगा।
वहीं शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के पार्टनर रुद्र कुमार पांडेय ने कहा कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों से आने वाला FDI भारत के लिए एक मजबूत और स्थायी आधार बनता जा रहा है। उनका कहना है कि एआई, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स जैसे तकनीक आधारित सेक्टर विदेशी निवेश के प्रमुख केंद्र बने रहेंगे।
किन देशों और सेक्टरों से आता है सबसे ज्यादा FDI
भारत में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश मॉरीशस और सिंगापुर से आता है, जिनकी हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत है। इसके बाद अमेरिका, नीदरलैंड्स, जापान और ब्रिटेन का स्थान आता है। सेक्टरों की बात करें तो सेवाएं, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर, टेलीकॉम, ट्रेडिंग, कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट, ऑटोमोबाइल, केमिकल और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा FDI आकर्षित करते हैं।
अधिकांश सेक्टरों में एफडीआई ऑटोमैटिक रूट से आता है, जबकि टेलीकॉम, मीडिया, फार्मा और इंश्योरेंस जैसे सेक्टर्स में सरकारी मंजूरी जरूरी होती है। वहीं कुछ सेक्टर्स जैसे लॉटरी, जुआ, चिट फंड, और तंबाकू उत्पादों के निर्माण में FDI प्रतिबंधित है।
क्यों जरूरी है FDI?
आने वाले सालों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए भारत को बड़े निवेश की जरूरत होगी। ऐसे में FDI न केवल आर्थिक ग्रोथ को गति देगा, बल्कि भुगतान संतुलन और रुपये की स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
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