3 साल में जर्मनी और जापान से भी बड़ी हो जाएगी भारत की इकोनॉमी: नीति आयोग के CEO

नीति आयोग के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) बी वी आर सुब्रह्मण्यम ने गुरुवार को कहा कि भारत की इकोनॉमी अगले तीन सालों में जर्मनी और जापान से बड़ी हो जाएगी, और अगर ऐसे ही रफ्तार जारी रही तो भारत 2047 तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकती है। इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत की इकोनॉमी का आकार फिलहाल 4.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है

अपडेटेड Apr 18, 2025 पर 6:47 PM
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नीति आयोग के CEO सुब्रह्मण्यम ने कहा, "2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है"

नीति आयोग के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) बी वी आर सुब्रह्मण्यम ने गुरुवार को कहा कि भारत की इकोनॉमी अगले तीन सालों में जर्मनी और जापान से बड़ी हो जाएगी, और अगर ऐसे ही रफ्तार जारी रही तो भारत 2047 तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकती है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "इस समय भारत की इकोनॉमी दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी है। अगले साल के अंत तक हम चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएंगे, और उसके एक साल बाद तीसरे स्थान पर पहुंच जाएंगे।"

इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत की इकोनॉमी का आकार फिलहाल 4.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।

सुब्रह्मण्यम ने कहा, "हम तीन साल के भीतर जर्मनी और जापान से आगे निकल जाएंगे और 2047 तक, भारत की अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है।"


उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया का शिक्षा हब बनने की भी पूरी क्षमता है और इसकी सबसे बड़ी ताकत लोकतंत्र है, जिसे दुनिया में सराहा जाता है। सुब्रह्मण्यम ने भारतीय कंपनियों, खासकर कानूनी और अकाउंटिंग फर्मों से अपील किया कि वे ग्लोबल स्तर पर लीडर बनने की महत्वाकांक्षा रखें।

उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम आय वर्ग वाले देशों की समस्याएं अब अलग प्रकार की हैं। उन्होंने कहा, “यह अब भूखों को भोजन देने या नंगों को कपड़े देने की बात नहीं है, बल्कि नॉलेज इकोनॉमी यानी ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की बात है।”

सुब्रह्मण्यम ने बताया कि दुनिया ने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी है, जब जनसंख्या घटी। लेकिन आने वाले समय में दुनिया जनसंख्या के घटने की चुनौती का सामना करने जा रही है। उनके मुताबिक जापान 15000 भारतीय नर्सों को ले रहा है और जर्मनी 20,000 स्वास्थ्य कर्मियों को ले रहा है क्योंकि उनके पास पर्याप्त कामकाजी लोग नहीं हैं और उनके पारिवारिक ढांचे टूट चुके हैं।

उन्होंने कहा, "भारत दुनिया भर में कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की एक स्थिर सप्लाई देगा...यही हमारी सबसे बड़ी ताकत बनने वाली है।"

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