भारत और अमेरिका के बीच मिनी ट्रेड डील फाइनल होने के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। इसकी वजह है कि भारत के साथ अगले दौर की बातचीत के लिए अमेरिकी डेलिगेशन का 25 अगस्त का दौरा अब नहीं होगा। इसे किसी और तारीख के लिए रीशेड्यूल किया जा रहा है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर आगे की बातचीत के लिए अगले दौर की चर्चा नई दिल्ली में होने की उम्मीद थी। छठे दौर की बातचीत 25-29 अगस्त तक निर्धारित थी।
एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि अमेरिकी डेलिगेशन के दौरे को रीशेड्यूल किया जाएगा और यह पहले की योजना के अनुसार 25 अगस्त को नहीं हो रहा है। दोनों देशों ने ट्रेड डील पर बातचीत इस साल मार्च में शुरू की थी। तब से अब तक 5 राउंड की बातचीत हो चुकी हैं। आखिरी बार दोनों देशों के अधिकारी जुलाई में अमेरिका में मिले थे। ट्रेड डील को इस साल सितंबर तक फाइनल किए जाने का प्लान है।
क्या टल जाएंगे 25 प्रतिशत के सेकेंडरी टैरिफ
ट्रेड डील पर बातचीत का छठा राउंड रीशेड्यूल होना टैरिफ टेंशन के बीच मायने रखता है। अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान पर 25 प्रतिशत के एडिशनल टैरिफ या सेकेंडरी टैरिफ 27 अगस्त से लागू होने वाले हैं। इससे टैरिफ की कुल दर 50 प्रतिशत हो जाएगी। 25 प्रतिशत की एक दर पहले ही 7 अगस्त से लागू हो चुकी है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब संकेत दिया है कि उनका प्रशासन हो सकता है कि रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखने वाले देशों पर सेकेंडरी टैरिफ न लगाए।
यह 15 अगस्त को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ट्रंप की मीटिंग के बाद हुआ। इस मीटिंग का उद्देश्य यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के लिए युद्धविराम की स्थापना करना था। हालांकि यह बैठक बेनतीजा रही, लेकिन उम्मीद है कि ट्रंप 18 अगस्त को वॉशिंगटन में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मिलेंगे और रूस के साथ शांति समझौते पर आगे बातचीत करेंगे। मॉस्को में ट्रंप और पुतिन की एक और मीटिंग होने के भी संकेत हैं।
अमेरिका को भेजे जाने वाले ज्यादा भारतीय सामानों पर फिलहाल 25 प्रतिशत टैरिफ लग रहा है। भारत का लक्ष्य अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के जरिए अपने निर्यात पर लगने वाले टैरिफ को कम करना है। पिछले 10 साल में अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड लगभग दोगुना हो गया है। 2013 में यह 64.6 अरब डॉलर पर था, लेकिन 2024 में बढ़कर 118.4 अरब डॉलर हो गया।