इंडियन कंसल्टिंग फर्मों ने सरकार से पब्लिक सेक्टर इम्पैनलमेंट के नियमों में बदलाव करने की गुजारिश की है। इन कंपनियों का मानना है कि इन नियमों की वजह से दुनियाभर में बिग 4 नाम से मशहूर विदेशी कंसल्टिंग कंपनियों को काफी फायदा मिलता है। बिग-4 का मतलब डेलॉयट, पीडब्ल्यूसी, ईवाय और केपीएमजी से है। मनीकंट्रोल ने इससे पहले खबर दी थी कि सरकार बिग 4 की जगह इंडियन कंसल्टिंग कंपनियों को बढ़ावा देना चाहती है। सरकार का प्लान देश में बिग 4 के टक्कर की कंसल्टिंग कंपनियां बनाने का है।
अभी PSU के इम्पैनलमेंट के लिए यह है नियम
अभी पब्लिक सेक्टर इम्पैनलमेंट के लिए एक ऐसा नियम है, जिसके चलते बिग 4 को काफी फायदा होता है। यह नियम कहता है कि पब्लिक सेक्टर इम्पैनलमेंट के लिए किसी कंसल्टिंग का टर्नओवर 500 करोड़ और एंप्लॉयीज की संख्या 500 होनी चाहिए। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज (NICSI) जैसी इम्पैनलिंग एजेंसियों ने यह नियम बनाया है। इंडियन कंसल्टिंग कंपनियों का कहना है कि इस नियम की वजह इंडियन कंपनियां सरकारी कंपनियों (PSU) के एडवायजरी प्रोजेक्ट्स के लिए बोली नहीं लगा पाती हैं।
NICSI पीएसयू इम्पैनलमेंट के नियम तय करती है
NICSI मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) के तहत आती है। यह सरकारी कंपनियों में बोली लगाने के लिए जरूरी नियम एवं शर्तें तय करती है। इंडियन कंसल्टिंग कंपनियों का कहना है कि यह नियम बिग 4 कंपनियों के पक्ष में झुका हुआ है। उनका मानना है कि अगर इस नियम में बदलाव किया जाता है तो इससे घरेलू कंसल्टिंग कंपनियां भी PSU फर्मों के एडवायजरी प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगा सकेंगी।
घरेलू कंसल्टिंग कंपनियां एक समान मौके चाहती हैं
इस मसले से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "घरेलू कंसल्टिंग कंपनियां एक समान बिजनेस के मौके चाहती हैं। NICS का नियम कहता है कि सिर्फ ऐसी कंसल्टिंग कंपनियां किसी सरकारी कंपनी के एडवायजरी प्रोजेक्ट के लिए बोली लगा सकती है, जिसका टर्नओवर 500 करोड़ रुपये है और जिसमें 500 एंप्लॉयीज काम करते हैं। इस नियम से इंडियन कंसल्टिंग कंपनियां सरकारी कंपनी के एडवायरी प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने के रेस से बाहर हो जाती हैं।"
सरकार बिग 4 के टक्कर की इंडियन कंपनियां बनाना चाहती है
उन्होंने कहा कि हमारा यह कहना नहीं है कि बिग 4 को पीएसयू के एडवायजरी प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने से रोक दिया जाए। हमारा यह मानना है कि सरकार को पीएसयू के एडवायजरी प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने का मौका कम से कम 8-10 कंपनियों को देना चाहिए। ऐसा तभी होगा जब टर्नओवर को घटाकर 25-50 करोड़ रुपये कर दिया जाए। प्राइम मिनिस्टर्स ऑफिस (PMO) ने बिग 4 जैसी कंपनियां देश में ही बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए 5 जून को एक बैठक बुलाई थी।