अब सिर्फ 'एडवांस पेमेंट' पर मिलेगा फ्यूल, मिडिल ईस्ट संकट के बीच IOCL, BPCL और HPCL ने सख्त किए नियम

OMC Fuel Credit Halt: रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियों ने अपनी दशकों पुरानी क्रेडिट पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। HPCL और BPCL ने पिछले हफ्ते से ही डीलरों से एडवांस पेमेंट मांगना शुरू कर दिया है। वहीं देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने भी सोमवार से अपनी '5-दिन की रिवॉल्विंग क्रेडिट' पॉलिसी को सस्पेंड कर दिया है

अपडेटेड Mar 17, 2026 पर 10:49 AM
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पहले डीलरों को ईंधन खरीदने के लिए कुछ दिनों की मोहलत मिलती थी, लेकिन अब उन्हें तेल का ऑर्डर देने से पहले ही भुगतान करना होगा

West Asia War Rattles Oil Supplies: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उपजे ऊर्जा संकट का असर अब भारत के पेट्रोल पंपों और उनके सप्लाई पर दिखने लगा है। देश की तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियों IOCL, BPCL और HPCL ने पेट्रोल पंप डीलरों को उधार पर ईंधन देना बंद कर दिया है।

उधार बंद, एडवांस पेमेंट शुरू

मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियों ने अपनी दशकों पुरानी क्रेडिट पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। HPCL और BPCL ने पिछले हफ्ते से ही डीलरों से एडवांस पेमेंट मांगना शुरू कर दिया है। वहीं देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने भी सोमवार से अपनी '5-दिन की रिवॉल्विंग क्रेडिट' पॉलिसी को सस्पेंड कर दिया है। पहले डीलरों को ईंधन खरीदने के लिए कुछ दिनों की मोहलत मिलती थी, लेकिन अब उन्हें तेल का ऑर्डर देने से पहले ही भुगतान करना होगा।


कौन सी सुविधाएं हुईं बंद?

आमतौर पर तेल कंपनियां डीलरों को तीन तरह से भुगतान की सुविधा देती थीं:

ड्राफ्ट ऑन डिलीवरी: उसी दिन खरीद और शाम तक भुगतान जो अब बंद कर दी गई है।

रिवॉल्विंग क्रेडिट: 3-5 दिन का उधार और छठे दिन भुगतान। इसे भी बंद कर दिया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक डीलर फाइनेंस: बैंक के जरिए 15-30 दिन का क्रेडिट। ये सुविधा फिलहाल जारी है।

'कंसोर्टियम ऑफ इंडियन पेट्रोलियम डीलर्स' (CIPD) के अध्यक्ष उदय लोध ने पुष्टि की है कि सरकारी कंपनियों ने अब एडवांस पेमेंट पर जोर देना शुरू कर दिया है।

आम आदमी और उद्योगों पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का करीब 40% कच्चा तेल इन्हीं प्रभावित रास्तों से मंगवाता है। सप्लाई चेन में आए जोखिम के कारण कंपनियां अब पेमेंट सिक्योर करने और रिस्क कम करने को प्राथमिकता दे रही हैं। खेती, ट्रांसपोर्ट और उद्योगों से जुड़े वे बड़े खरीदार जो उधार पर ईंधन लेते थे, उन्हें अब मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं डीलरों के पास कैश की कमी होने पर वे कम मात्रा में ईंधन मंगवाएंगे, जिससे छोटे पंपों पर स्टॉक की कमी महसूस हो सकती है।

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