बैंकों के अपने ग्राहकों को जबर्दस्ती इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने के प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए बैंकअश्योरेंस के नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है। IRDAI के पूर्व चेयरमैन सुभाष सी खुंटिया ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि इस बारे में नियमों को बताने की जरूरत है ताकि बैंक इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने में ज्यादा सावधानी बरतें। अभी बैंक ग्राहकों पर इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं। अगर ऐसी शिकायतें आती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। HDFC Bank ने 5 जून को कोलकाता में अपने एक अधिकारी को सस्पेंड कर दिया। उस पर इनटर्नल मीटिंग में अपने सहकर्मी के साथ बदतमीजी करने का आरोप था। ट्विटर पर सर्कुलेट हुए एक वीडियो में ऑफिसर को अपने जूनियर साथियों पर चिल्लाते देखा ज सकता है। वह बैंकिंग और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स ज्यादा संख्या में नहीं बेचने पर जूनियर स्टाफ पर नाराजगी जता रहा था।
बैंकिंग और इंश्योरेंस इंडस्ट्रीज को अलग करना मुमकिन नहीं
खुंटिया ने कहा कि अभी इंडिया में बैंकिंग और इंश्योरेंस इंडस्ट्रीज को अलग करना मुमकिन नहीं है। इसका एक समाधान यह हो सकता है कि बैंकों को इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने की इजाजत नहीं दी जाए। लेकिन, बैंकों की पहुंच देश के दूरदराज तक के हिस्सों में है। वे ग्रामीण इलाकों में भी मौजूद हैं। उधर, इंश्योरेंस कंपनियों के ऑफिसेज हर इलाके में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बैंक की शाखाओं में भी सभी अधिकारियों को इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने की इजाजत नहीं है।
सभी अधिकारियों को बेचने की इजाजत नहीं
उन्होंने कहा कि अगर एक ब्रांच को इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने की इजाजत मिलती है तो सिर्फ एक या दो अधिकारी इसे बेच सकते हैं। उन्हें इसके लिए ट्रेनिंग मिली होती है। उन्हें यह पता होता है कि इन प्रोडक्ट्स को किस तरह बेचना है। दूसरे अधिकारियों के इसे बेचने की उम्मीद नहीं की जाती है। दूसरी बात यह जरूरी है कि इंश्योरेंस कंपनियों की संख्या सीमित होनी चाहिए, जिनके प्रोडक्ट्स बैंक बेच सकते हैं। इसकी वजह यह है कि अगर एक बैंक को कई बीमा कंपनियों के प्रोडक्ट्स बेचने की इजाजत दी जाती है तो अफसर कनफ्यूज्ड हो सकते हैं। उन्हें हर प्रोडक्ट की डिटेल के बारे में जानकारी नहीं होगी।
अभी बीमा कंपनियों की पहुंच सीमित
आईआरडीएआई के पूर्व चेयरमैन ने कहा कि ऐसा समय आएगी जब बीमा कंपनियों के ऑफिसेज हर जगह होंगे। तब बैंकिंग और इंश्योरेंस को अलग-अलग करना मुमकिन होगा। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि बैंकों को इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचने की इजाजत नहीं देने का भी नुकसान है। इसकी वजह यह है कि हम डेवलपिंग स्टेज में हैं। इसलिए इंश्योरेंस कंपनियों की पहुंच अभी देश के हर इलाके में नहीं है।"