चीन के AI मॉडल 'डीपसीक (DeepSeek)' ने लॉन्च होते ही पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया है। हालांकि यह ऐप समय में लॉन्च हुआ है, जब चीन का एक और लोकप्रिय ऐप 'टिकटॉक' विलुप्त होने के कगार पर है। भारत ने इस ऐप को काफी पहले साल 2020 में ही बैन कर दिया था। वहीं अब अमेरिका में भी डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद इस ऐप को जल्द ही बैन होने की उम्मीद जताई जा रही है। टिकटॉक ऐप के बैन होने की पीछे की सबसे बड़ी वजह, डेटा की गोपनीयता रही।
हालांकि टिकटॉक के अधिकारियों ने लगातार चीन की सरकार के साथ डेटा शेयर करने के आरोपों से इनकार किया है। लेकिन इसके साथ ही यह भी सही है कि चीन की सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए कभी भी इन डेटा तक पहुंच सकती है। चीन के डेटा प्रोटेक्शन कानून (PIPL) के मुताबिक, वहां की कंपनी को जरूरत पड़ने पर अपने यूजर्स का डेटा सरकार को मुहैया करना अनिवार्य है और TikTok किसी भी तरह से अपने देश के कानूनों के खिलाफ नहीं जा सकता।
हालांकि ऐसा लगता है कि डेटा शेयरिंग के मामले में DeepSeek ऐप, टिकटॉक से भी आगे निकल गया है। यह ऐप यूजर्स की की निजी चैट्स को न सिर्फ इकट्ठा करता है, बल्कि इन्हें सीधे चीन के सर्वर पर स्टोर करता है।
भारत में फिलहाल DeepSeek के यूजर्स का कोई स्पष्ट डेटा अभी उपलब्ध नहीं है। लेकिन अमेरिका में यह काफी तेजी से लोकप्रिय हुआ है। लॉन्च होने के एक हफ्ते के अंदर ही यह ऐप स्टोर पर सबसे ज़्यादा डाउनलोड किया जाने वाला ऐप बन गया। यहां तक कि इसने चैटजीपीटी (ChatGPT) को भी पीछे छोड़ दिया।
DeepSeek ऐप कुछ ही समयों में यूजर्स के जटिल कामों को पूरा कर देता है। लेकिन अगर आपने थियानमेन चौक या भारत-चीन युद्ध जैसे विषयों से सवाल पूछे तो फिर इसे सांप सूंघ जाता है। इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह से फ्री है। लेकिन जब आप इसके FAQ पेज पर जाते हैं तो आपको एहसात होता है कि यह आपको मुफ्त सेवा देने के बदले क्या चीजें ले रही हैं।
DeepSeek के FAQ पेज पर दी गई जानकारी के मुताबिक यहऐप यूजर्स से जुड़ी कई जानकारियां उठाता है, जैसे कि प्रोफाइल जानकारी, चैट्स (आपके AI चैटबॉट से की गई बातचीत), पेमेंट जानकारी, IP एड्रेस, डिवाइस ID, और कुकीज। इन जानकारियों से यह ऐप आपकी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करता है, विभिन्न प्लेटफॉर्म पर आपके डिवाइस को पहचान सकता है, और आपके इस्तेमाल के अनुसार डेटा जुटाता है। DeepSeek आपकी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए कुकीज और वेब बीकन का इस्तेमाल करता है। इसके अलावा, यह आपकी टाइपिंग शैली, डिवाइस मॉडल, और ऑपरेटिंग सिस्टम जैसी तकनीकी जानकारी भी जुटाता है।
चीन के सर्वर पर डेटा स्टोरेज
DeepSeek का कहना है कि यूजर्स का डेटा पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना यानी चीन के सुरक्षित सर्वरों पर स्टोर किया जाता है। इसका मतलब है कि आपकी निजी बातचीत और अन्य जानकारियां सीधे चीन के हाथ में जाती हैं।
TikTok से कैसे अलग है DeepSeek?
TikTok मुख्य रूप से यूजर्स के व्यवहार, डिवाइस की जानकारी और लोकेशन डेटा पर नजर रखता है,लेकिन DeepSeek बिना छिपाए आपकी निजी बातचीत को भी मॉनिटर करता है।
डेवलपर्स के लिए ओपन-सोर्स कोड
DeepSeek का कोड ओपन-सोर्स है, जिसका मतलब है कि डेवलपर्स इसे अपने सर्वर पर होस्ट कर सकते हैं और उसमें बदलाव कर सकते हैं। हालांकि, आधिकारिक DeepSeek ऐप में यूजर्स की जानकारी चीन के सर्वर पर भेजी जाती है।
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