कानपुर लोन घोटाला: कैसे कारोबारी राजेश बोथरा ने बैंकों को लगाया हजारों करोड़ का चूना? घोटाले की पूरी स्टोरी

Kanpur Loan Scam: उत्तर प्रदेश के कानपुर से जुड़े एक कथित बड़े बैंक घोटाले ने जांच एजेंसियों और बैंकिंग सिस्टम में हलचल मचा दी है। आरोप है कि शहर की बिरहाना रोड पर स्थित एक लगभग बंद पड़ी दुकान को आधार बनाकर फर्जी कंपनियां खड़ी की गईं और इन्हीं के जरिए सरकारी बैंकों के एक समूह यानी कंसोर्टियम से हजारों करोड़ रुपये के कर्ज हासिल करने की कोशिश की गई

अपडेटेड Jan 10, 2026 पर 9:56 PM
Story continues below Advertisement
Kanpur Loan Scam: इस पूरे मामले की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI) कर रही है

Kanpur Loan Scam: उत्तर प्रदेश के कानपुर से जुड़े एक कथित बड़े बैंक घोटाले ने जांच एजेंसियों और बैंकिंग सिस्टम में हलचल मचा दी है। आरोप है कि शहर की बिरहाना रोड पर स्थित एक लगभग बंद पड़ी दुकान को आधार बनाकर फर्जी कंपनियां खड़ी की गईं और इन्हीं के जरिए सरकारी बैंकों के एक समूह यानी कंसोर्टियम से हजारों करोड़ रुपये के कर्ज हासिल करने की कोशिश की गई। इस पूरे मामले की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI) कर रही है।

जांच उस समय तेज हुई जब इस दुकान के तार सिंगापुर में रह रहे कारोबारी राजेश बोथरा (Rajesh Bothra) से जुड़े पाए गए। राजेश बोथरा को नवंबर में दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक होटल से 32 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में गिरफ्तार किया गया था। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने 7 जनवरी को मुख्य आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।

जांच में सामने आया है कि बोथरा ग्रुप तीन कंपनियों के जरिए काम कर रहा था- फ्रॉस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी लिमिटेड, फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड और फ्रॉस्ट ग्लोबल लिमिटेड। इनमें से फ्रॉस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी लिमिटेड का रजिस्टर्ड पता वही दुकान थी, जो बिरहाना रोड पर स्थित थी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुकान ज्यादातर समय बंद रहती थी और वहां किसी तरह की नियमित कारोबारी गतिविधि के संकेत नहीं मिले।


जांच एजेंसियों का आरोप है कि बोथरा ग्रुप ने इसी पते के आधार पर ₹3,000 करोड़ तक के कर्ज के लिए कई बैंकों से संपर्क किया। इन बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दूसरे सरकारी बैंक शामिल बताए जा रहे हैं।

हालांकि कागजों में ये तीनों कंपनियां अलग-अलग कानूनी इकाइयों के रूप में दर्ज थीं, लेकिन जांच में यह बात सामने आई कि इनका नियंत्रण मुख्य रूप से एक ही समूह और व्यक्तियों के हाथ में था। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राजेश बोथरा और उसके करीबी सहयोगी इन कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और अहम फैसलों को संचालित कर रहे थे।

इस मामले की जड़ पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शिकायत मानी जा रही है। पीएनबी ने आरोप लगाया था कि फ्रॉस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (FIEL), उसके डायरेक्टरों, कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और दूसरे लोगों ने मिलकर करीब 31.60 करोड़ रुपये का गबन किया। इस शिकायत के आधार पर 19 मार्च 2021 को एफआईआर दर्ज की गई थी।

सीबीआई के अनुसार, FIEL ने फर्जी बिल ऑफ लैडिंग जमा कर लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की रकम का दुरुपयोग किया। इन दस्तावेजों के जरिए FIEL और बोथरा से जुड़ी दो अन्य कंपनियों के बीच फर्जी इंपोर्ट-एक्सपोर्ट दिखाया गया। एक सीबीआई प्रवक्ता के मुताबिक, मुख्य आरोपी ने साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई और जाली दस्तावेजों के सहारे बैंक से मिली रकम को बाहर निकाल लिया, जिससे पीएनबी को लगभग 32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि राजेश बोथरा सीबीआई की एंटी-करप्शन ब्रांच, लखनऊ से जुड़े अन्य मामलों में भी आरोपी है। कुछ मामलों में चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद वह न तो जांच में शामिल हुआ और न ही ट्रायल के दौरान अदालत में पेश हुआ। सीबीआई का कहना है कि वह कई अन्य बैंक धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध के मामलों में भी वांछित है।

यह भी पढ़ें- Stocks to Watch: सोमवार 12 जनवरी को फोकस में रहेंगे ये 8 शेयर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।