5g spectrum auction: 5G स्पेक्ट्रम से बदलेगी आपकी जिंदगी, नीलामी के बारे में यहां जानिए अपने हर सवाल का जवाब

5g spectrum auction: आज (26 जुलाई) 9 बैंड्स में करीब 72,000 मेगाहर्ट्ज की नीलामी 20 साल के लिए होगी। केंद्र सरकार के कैबिनेट ने 15 जून को नीलामी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी

अपडेटेड Jul 26, 2022 पर 1:27 PM
इस साल देश में 5जी सेवाएं मोबाइल सेवाएं (5G Telecom Services) शुरू हो जाने की उम्मीद है।

5g spectrum auction: 5G स्पेक्ट्रम (5G Spectrum) की नीलामी आज हो जाएगी। 9 बैंड्स में करीब 72,000 मेगाहर्ट्ज की नीलामी 20 साल के लिए होगी। केंद्र सरकार के कैबिनेट ने 15 जून को नीलामी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इस साल देश में 5जी सेवाएं मोबाइल सेवाएं (5G Telecom Services) शुरू हो जाने की उम्मीद है। आइए 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

स्पेक्ट्रम क्या है और यह कैसे काम करता है?

एयरवेव्स ऐसे रेडियो फ्रीक्वेंसीज हैं, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के तहत आते हैं। ये बगैर वायर टेलीकम्युनिकेशंस सहित कई तरह के इंफॉर्मेशन को कैरी करते हैं। सरकार कंपनियों या सेक्टर्स के इस्तेमाल के लिए एयरवेव्स का मैनेजमेंट और एलोकेशन करती है।

स्पेक्ट्रम को लो फ्रीक्वेंसी से हाई फ्रीक्वेंसी बैंड में बांटा जा सकता है। बैंड के हिसाब से इनका इस्तेमाल और एलोकेशन निर्धारित होता है।


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लो-फ्रीक्वेंसी वेव का मतलब ऐसे वेव से है, जो एक सेकेंड में कुछ बार रिपीट होता है, जबकि हाई फ्रीक्वेंसी वेव एक सेकेंड में कई बार रिपीट होता है। हाई फ्रीक्वेंसी वेव ज्यादा डेटा कैरी करते हैं, लेकिन इन्हें आसानी से ब्लॉक या बाधित किया जा सकता है। लोअर-फ्रीक्वेंसी वेव का कवरेज व्यापक होता है।

टेलीकॉम कंपनियों को कौन सा स्पेक्ट्रम चाहिए?

GSM एसोसिएशन के मुताबिक, टेलीकॉम सेवाओं के लिए 400 मेगाहर्ट्सज से 4 गीगाहर्ट्ज की रेंज सबसे अच्छी मानी जाती है। जीएसएम एक ऑर्गेनाइजेशन है, जो मोबाइल नेटवर्क कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।

मोबाइल सर्विसेज कंपनियां स्पेक्ट्रम की उपलब्धता होने पर एक फ्रीक्वेंसी बैंड का इस्तेमाल कर 2जी, 3जी, 4जी और 5जी सेवाएं प्रोवाइड कर सकती हैं।

इंडिया में मोबाइल टेक्नोलॉजी के लिए 2जी सेवाओं के लिए 900 मेगाहर्ट्ज और 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड्स का इस्तेमाल होता है। 3जी सेवाओं के लिए 900 से 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड का इस्तेमाल होता है। 4जी सेवाएं के लिए 850, 1800, 2300 और 2500 मेगाहर्ट्ज का इस्तेमाल होता है। 5जी के लिए 3.5 मेगाहर्ट्ज और 700 मेगाहर्ट्ज बैंड का इस्तेमाल होता है।

पिछले 20 साल से 900 मेगाहर्ट्ज बैंड का इस्तेमाल हो रहा है। इसका कमर्शियल इकोसिस्टम सुपीरियर है। यह जीएसएम बैंड वॉयल कॉल और 4जी ब्रॉडबैंड सर्विसेज के लिए उपयुक्त (Suitable) है। 900 मेगाहर्ट्ज के बाद 1800 मेगाहर्ट्ज बैंज जीएसम के लिए उपयुक्त है। यह एलटीई (Long-term Evolution) के लिए भी इस्तेमाल होने वाला कोर बैंड है।

किस स्पेक्ट्रम के लिए ऑपरेटर्स बोलियां लगाएंगे?

सरकार निर्धारित बैंड में स्पेक्ट्रम के फिक्स्ड अमाउंट की नीलामी करती है। इसका इस्तेमाल ऑपरेटर्स कंज्यूमर्स को कम्युनिकेशंस और नेटवर्क सर्विसेज प्रोवाइड करने के लिए करते हैं।

पहले की नीलामी से ऑपरेटर्स के पास अलग-अलग बैंड में कुछ अमाउंट में स्पेक्ट्रम हो सकते हैं। वे आज की नीलामी में और स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगा सकते हैं, जिससे उनकी एयरवेव्स होल्डिंग्स मजबूत होगी। कम से कम 5 मेगाहर्टज या इससे ज्यादा के बैंड में Contiguous Spectrum मिलने से हाई स्पीड डेटा प्रोसेसिंग में मदद मिलती है।

26 जुलाई को होने वाली नीलामी में किस स्पेक्ट्रम की नीलामी होगी?

आज की नीलामी में 72,000 मेगाहर्ट्ज से ज्यादा और 9 बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी होगी। ये बैंड्स 600 मेगाहर्ट्ज, 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्टज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्टज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज, 3.3 गीगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज रेंज में होंगे।

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