MC Explains : क्या आप Indian Oil के छोटू और मुन्ना को जानते हैं?

IOC ने छोटे एलपीजी सिलेंडर इसलिए लॉन्च किए थे, क्योंकि गांव और छोटे शहरों में बड़ी संख्या में लोग कामधंधे की तलाश में बड़े शहर आते हैं। उनके पास एड्रेस प्रूफ सहित कई डॉक्युमेंट नहीं होते हैं। गैस की इनकी खपत भी अपेक्षाकृत कम होती है। दरअसल ये सिलेंडर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए लॉन्च किए गए थे

अपडेटेड Jul 12, 2023 पर 2:29 PM
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IOC ने कहा है कि उत्तर-पूर्व में छोटू को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में करीब 60,000-65,000 सिलेंडर्स की बिक्री हुई थी। इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में 15,000 सिलेंडर्स की बिक्री हो चुकी है।

Indian Oil Corporation (IOC) छोटू (Chotu) की सफलता के बाद उत्तर-पूर्वी इलाकों में मुन्ना लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। छोटू और मुन्ना इंडियन ऑयल के रसोई गैस (LPG) के छोटे सिलेंडर हैं। इनका वजह क्रमश: 5 किलो और 2 किलो है। मनीकंट्रोल ने उत्तर-पूर्व में इन सिलेंडर्स के लॉन्च होने की वजह और उनकी कीमतें जानने की कोशिश की। कंपनी ने छोटू को उत्तर-पूर्व में 2020 में लॉन्च किया था। मुन्ना पहले से देश के बाकी हिस्सों में उपलब्ध है।

IOC मुन्ना और छोटू क्यों लॉन्च कर रही है?

कंपनी ने कहा है कि छोटे सिलेंडर उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों के लिए बहुत हेल्पफुल होंगे, क्योंकि पहाड़ों इलाकों में इन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होगा। इसका मतलब है कि कंपनी के छोटे सिलेंडर जो अभी करीब देश के ज्यादातर हिस्सों में उपलब्ध हैं, अब उत्तर-पूर्वी इलाकों में भी उपलब्ध होंगे। बड़े सिलेंडर के मुकाबले छोटू और मुन्ना की कीमतें कम हैं। ये ज्यादा सुरक्षित है। इन्हें एक जगह से दूसरे जगह ले जाना आसान हैं और इन्हें लेने के लिए ज्यादा डॉक्युमेंट देने की जरूरत भी नहीं पड़ती है।


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IOC ने कहा है कि उत्तर-पूर्व में छोटू को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में करीब 60,000-65,000 सिलेंडर्स की बिक्री हुई थी। इस फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में 15,000 सिलेंडर्स की बिक्री हो चुकी है। अभी उत्तर-पूर्व में आईओसी के 871 डिस्ट्रिब्यूटर्स हैं। इसके एक्टिव कस्टमर की संख्या 91 लाख है। इस इलाकों में LPG का कुल कस्टमर बेस 1.12 करोड़ है। मिजोरम, मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा में एलपीजी सिलेंडर्स की उपलब्धता 87 फीसदी है।

पहली बार छोटे सिलेंडर कब लॉन्च हुए थे?

IOC ने 2020 में छोटू नाम से 5 किलोग्राम के सिलेंडर लॉन्च किए थे। तब कंपनी ने कहा था कि इससे लोगों को सिलेंडर बुक कराने में आसानी होगी। लेकिन, इससे पहले कंपनी ने 2014 में 5 किलोग्राम के सिलेंडर लॉन्च किए थे। छोटे एलपीजी सिलेंडर कंपनी ने इसलिए लॉन्च किए, क्योंकि गांव और छोटे शहरों में बड़ी संख्या में लोग कामधंधे की तलाश में बड़े शहर आते हैं। उनके पास एड्रेस प्रूफ सहित कई डॉक्युमेंट नहीं होते हैं। गैस की इनकी खपत भी अपेक्षाकृत कम होती है। दरअसल ये सिलेंडर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए लॉन्च किए गए थे। छोटे सिलेंडर को लेने के लिए कस्टमर को सिर्फ एक आईडी प्रूफ देना होता है।

इनकी कीमत कितनी है?

मुन्ना की प्रति किलो गैस की कीमत उतनी ही है, जितनी रेगुलर घरेलू सिलेंडर की होती है। दिल्ली में छोटू यानी 5 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत 405 रुपये है। इसके मुकाबले 14.2 किलोग्राम के रेगुलर सिलेंडर की कीमत 1,103 रुपये है। BPCL और HPCL भी ग्राहकों को छोटे आकार के सिलेंडर, ऑफर करती हैं। एचपीसीएल के 5 किलो के सिलेंडर का नाम अप्पू है।

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