करीब 90 फीसदी से भी अधिक फ्रेशर्स ने विप्रो (Wipro) की ओर से कम सैलरी पर काम करने के दिए ऑफर को स्वीकार कर लिया है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द ज्वाइनिंग मिल सके। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में आईटी कंपनी के सीनियर अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। बता दें कि विप्रो इसी साल फरवरी में फ्रेशर्स को लगभग आधी सैलरी पर काम करने के ऑफर पर विचार करने को कहा था। उस वक्त विप्रो का यह ऑफर काफी सुर्खियों में रहा था। विप्रो ने जिन उम्मीदवारों को पहले 6.5 लाख रुपये सालाना के सैलरी पैकेज पर काम करने को ऑफर दिया था, उनसे लेटर लिखकर पूछा था कि क्या वह 3.5 लाख रुपये सालाना की सैलरी पैकेज पर काम करने को तैयार हैं।
ईटी ने विप्रो के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर जतिन दलाल के हवाले से बताया, "फ्रेशर्स को दोनों विकल्प दिए गए थे और करीब 92% कैंपस से हायर किए फ्रेशर्स ने ओरिजनल ऑफर पर विप्रो को ज्वाइन करना चुना है।"
विप्रो ने हाल ही में अपनी मार्च तिमाही के नतीजे जारी करते हुए कंपनी के एट्रिशन रेट (attrition rate) यानी कर्मचारियों के कंपनी छोड़कर जाने की दर में लगातार चौथी तिमाही में कमी आई है। मार्च तिमाही तक के आंकड़ों के मुताबिक, विप्रो में कुल 2,56,921 कर्मचारी हैं। यह दिसंबर तिमाही के मुकाबले 1823 कर्मचारी कम है। दिसंबर तिमाही में कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 2,58,744 थी। वहीं सितंबर तिमाही के अंत में यह आंकड़ा 2,59,179 कर्मचारियों का था।
इससे पहले विप्रो जनवरी में अपने सैंकड़ों फ्रेशर्स कर्मचारियों को एक साथ नौकरी से निकालने को लेकर सुर्खियों में थी। विप्रो ने तब एक बयान में बताया था कि इन कर्मचारियों को ट्रेनिंग के बाद हुए एक इंटरनल टेस्ट में फेल होने के चलते निकाल गया है।
इससे पहले पिछले साल विप्रो ने अपने करीब 300 कर्मचारियों को 'मूनलाइटिंग' के आरोप में नौकरी से निकाला था। विप्रो ने कहा था कि ये कर्मचारी कंपनी के पेरोल पर काम करते हुए, दूसरी कंपनियों के लिए भी काम कर रहे थे, जो नैतिक रूप से सही नहीं है।