रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी का कहना है कि भारत में बचत की परंपरा बहुत पुरानी और मजबूत रही है। लेकिन, वो बचत बड़े पैमाने पर उत्पादक निवेश और वेल्थ क्रिएशन में तब्दील नहीं हो पाई।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी का कहना है कि भारत में बचत की परंपरा बहुत पुरानी और मजबूत रही है। लेकिन, वो बचत बड़े पैमाने पर उत्पादक निवेश और वेल्थ क्रिएशन में तब्दील नहीं हो पाई।
रिलायंस के प्रमुख ने कहा कि इसी खाली जगह को JioBlackRock भर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर घरेलू बचत को भरोसेमंद और सुलभ निवेश विकल्पों के जरिए कैपिटल मार्केट से जोड़ा जाए, तो वो बचत आय और संपत्ति बनाने का जरिया बन सकती है।
मुंबई में JioBlackRock के फायरसाइड चैट के दौरान BlackRock के सीईओ Larry Fink साथ बातचीत में अंबानी ने इसी बदलाव को भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक संभावना बताया।
बचत तो हुई, लेकिन उत्पादक नहीं
मुकेश अंबानी ने कहा कि बीते पांच-छह दशकों में भारतीयों ने लगातार बचत की है। लेकिन वह बचत बड़े पैमाने पर उत्पादक नहीं रही।
उनके मुताबिक, JioBlackRock का मूल अवसर घरेलू व्यवहार में बदलाव लाने में है। यह प्लेटफॉर्म जनता को सिर्फ बचत जमा करने से आगे बढ़कर पूंजी बाजारों में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा। इसके लिए आसान और भरोसेमंद निवेश विकल्प उपलब्ध कराएगा।
सेवर्स से इन्वेस्टर्स बनने की राह
मुकेश अंबानी ने कहा कि JioBlackRock का फोकस सेवर्स को इन्वेस्टर्स में बदलने और घर में पड़ी बचत को आय पैदा करने वाली संपत्तियों में बदलने के रास्ते देने पर है। उन्होंने, 'हमारा अवसर भारतीयों को बचत के साथ-साथ यह विकल्प देना है कि वे अपनी बचत को कमाई में बदल सकें।'
मानसिकता बनी रहे बचत
रिलायंस के चेयरमैन ने कहा कि इस बदलाव में भारत की मजबूत बचत मानसिकता को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उसे बनाए रखते हुए सोच का दायरा बढ़ाना जरूरी है।
उनका कहना था कि सोच को सिर्फ नुकसान और जोखिम से बचने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। लोगों को निवेश से डरने के बजाय उसे समझने और अपनाने का मौका मिलना चाहिए। निवेश के अवसर आसान और सबके लिए सुलभ होने चाहिए। आम लोगों के लिए निवेश कोई खास या मुश्किल चीज नहीं, बल्कि एक सामान्य और स्वाभाविक विकल्प बनना चाहिए।
पूंजी आवंटन का सामाजिक उद्देश्य
मुकेश अंबानी ने कहा कि Reliance Industries और BlackRock का नजरिया मूल रूप से एक जैसा है। उन्होंने बताया कि Larry Fink के साथ बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि पूंजी आवंटन का लक्ष्य केवल तात्कालिक रिटर्न तक सीमित नहीं होना चाहिए।
अंबानी के मुताबिक, अगर पूंजी को पहले समाज और अर्थव्यवस्था के व्यापक हित में काम पर नहीं लगाया जाता, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह जाता है। यही सोच रिलायंस के दर्शन का भी आधार है।
भारत के कैपिटल मार्केट्स को गहराई देने का रास्ता
मुकेश अंबानी ने कहा कि अगर लॉन्ग-टर्म कैपिटल को देश के आर्थिक और सामाजिक विकास से जोड़ा जाए, तो भारत के कैपिटल मार्केट्स कहीं ज्यादा मजबूत और गहरे बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ज्यादा घराने पैसिव सेविंग से निकलकर एक्टिव इन्वेस्टमेंट की ओर बढ़ेंगे, वे सिर्फ निवेशक नहीं रहेंगे, बल्कि देश की ग्रोथ में सीधे हिस्सेदार भी बनेंगे।
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