इंफोसिस (Infosys) के संस्थापक एनआर नारायणमूर्ति (NR Narayana Murthy) ने सरकार को प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल के शिक्षकों पर बड़ा निवेश करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल टीचर्स पर अगले 20 साल में कम से कम 1 अरब डॉलर निवेश करने की जरूरत है। उन्होंने कहा है कि इसके बेहतर नतीजे देखने को मिलेंगे। इंफोसिस प्राइज (Infosys Prize) के एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। इसका आयोजन इंफोसिस साइंस फाउंडेशन ने किया था। हर साल छह कैटेगरी में इंफोसिस की तरफ से यह अवॉर्ड दिया जाता है।
ट्रेनिंग प्रोग्राम एक साल का होगा
मूर्ति ने कहा कि न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के बेहतर नतीजों के लिए एक रास्ता यह हो सकता है कि विकसित देशों और इंडिया से 10,000 शानदार टीचर्स को आमंत्रित किया जाए। ये टीचर्स साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स के होने चाहिए। इन टीचर्स को हमारे 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के कॉलेजों को प्रशिक्षित करने का काम दिया जाए। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम एक साल का होना चाहिए।
टीचर्स ट्रेनिंग पर 20 साल में 20 अरब डॉलर खर्च होंगे
मूर्ति ने कहा कि ट्रेनर्स का एक समूह 100 प्राइमरी और 100 सेकेंडरी स्कूल टीचर्स को प्रशिक्षित कर सकता है। इस तरीके से हम एक साल में 2,50,000 प्राइमरी और 2,50,000 सेकेंडरी स्कूल टीचर्स को प्रशिक्षित कर सकते हैं। ट्रेनिंग देने वाले ये टीचर्स खुद 5 साल में ट्रेनर्स बन जाएंगे। हमे उन्हें एक साल में 1,00,000 डॉलर देना चाहिए। 20 साल के इस प्रोग्राम पर सालाना कुल 1 अरब डॉलर का खर्च आएगा। 20 साल में 20 अरब डॉलर खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि हम जल्द 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। इसलिए टीचर्स को प्रशिक्षित करने पर होने वाले इस खर्च को ज्यादा नहीं कहा जा सकता।
टीचर्स का सम्मान होना चाहिए
मूर्ति खुद के शिक्षक के बेटे हैं। उन्होंने कहा कि हमें शिक्षकों और रिसर्चर्स का सम्मान करने और उन्हें बेहतर सैलरी देने की जरूरत है। इंडिया को स्टेज 4 इनवेंशन और इनोवेशन के लिए तैयार होना चाहिए। यह नए प्रोसेस, प्रोडक्ट्स और सर्विसेज में हो सकता है। यह वैसा ही होगा जैसा अमेरिका, ज्यादातर यूरोपीय देशों, जापान और आस्ट्रेलिया में हो चुका है।
उन्होंने बताया कि कोई देश पहले स्टेज में इनोवेट नहीं करता है। स्टेज दो में वह दूसरे देशों के इनोवेशन और इनवेंशन के जरिए प्रोडक्ट्स और सर्विसेज देना शुरू करता है। तीसरे स्टेज में वह हायर एजुकेशन और रिसर्च का इस्तेमाल करता है। चौथे स्टेज में वह खुद नए प्रोसेसेज, प्रोडक्ट्स और सर्विसेज का इनवेंटर बन जाता है।