ओला इलेक्ट्रिक ने 1,400 से अधिक इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी जांचने के लिए वापस बुलाया है
ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) और उसके एक ग्राहक के बीच विवाद अब प्राइवेसी के उल्लंघन और डेटा के सत्यता के आरोप तक पहुंच गया है। ग्राहक का दावा है कि वह ओला की इलेक्ट्रिक स्कूटर की सवारी करते समय दुर्घटना का शिकार हुआ था। ओला ने इस मामले में ग्राहक की स्कूटर के डेटा को ट्विटर पर जारी कर इसे ग्राहक की गलती से हुआ दुर्घटना बताया। ग्राहक ने अब बिना उसकी सहमति के डेटा प्रकाशित कर प्राइवेसी के नियमों का उल्लंघन करने को लेकर ओला इलेक्ट्रिक को एक टेकडाउन नोटिस यानी ट्विटर पोस्ट हटाने के लिए कानूनी नोटिस भेजा है। इसके अलावा ग्राहक ने ओला के डेटा पर भी सवाल उठाए हैं।
इससे पहले ग्राहक ने स्कूटर के ब्रेक में कथित खामी को लेकर नोटिस भेजा था। इस नोटिस के चलते ओला को अब और अधिक आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, जो पहले ही अपने कुछ स्कूटर में आग लगने की घटना से जूझ रही है। ओला इलेक्ट्रिक ने 1,400 से अधिक इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी जांचने के लिए उन्हें वापस बुलाया है।
ताजा विवाद 26 मार्च का है, जब वकील रीतम सिंह देर रात गुवाहाटी के खानापारा हाईवे पर अपने पिता के नए ओला एस1 प्रो की सवारी कर रहे थे। रीतम सिंह का दावा है वह करीब 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सवारी कर रहा थे और तभी उन्हें सामने एक स्पीड-ब्रेकर दिखा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ब्रेक लगाते तो स्कूटर की स्पीड घटने की बजाय और बढ़ गई और वाहन ने अपना नियंत्रण खो दिया।
हालांकि करीब एक महीने बाद ओला इलेक्ट्रिक ने इस मामले में ट्वीट किया कि रीतम सिंह उस दिन ओवरस्पीड कर रहे था और उन्होंने घबराकर ब्रेक लगा दिया। कंपनी ने अपने दावे की पुष्टि करने के लिए स्कूटर का टेलीमेट्री डेटा भी डाला कि रीतम सिंह ओवरस्पीडिंग कर रहे थे। इससे लोगों ने रीतम सिंह की आलोचना शुरू कर दी। हालांकि रीतम सिंह का इस मामले में कहना है कि जब कंपनी ने दुर्घटना की जांच की तब वह उस समय मौजूद नहीं थे।
डेटा पर सवाल
रीतम सिंह ने मनीकंट्रोल को बताया, "10 दिनों के लिए स्कूटर उनके (ओला इलेक्ट्रिक के) पास था। मुझे कैसे पता चलेगा कि उस दौरान स्कूटर के डेटा से छेड़छाड़ नहीं की गई थी? इस डेटा की सत्यता को कैसे जांचा जा सकता गै? अगर यह मेरे सामने किया जाता - जैसे अगर उन्होंने मेरे सामने स्कूटर खोलकर उसकी जांच की होती - तब मैंने डेटा की वैधता पर सवाल नहीं उठाया होता।”
रीतम सिंह के पिता बलवंत सिंह ने अपने नोटिस में कहा कि कंपनी को स्कूटर के टेलीमेट्री डेटा को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए था।
बलवंत सिंह ने नोटिस में कहा, “ओला और हमारे बीच सिर्फ प्राइवेट एक्सेस के लिए डेटा शेयर करने के एक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ है। टेलीमेट्री डेटा को ऑनलाइन पोस्ट करना ग्राहक के तौर मेरे और विक्रेता के तौर पर ओला इलेक्ट्रिक के बीच हुए प्राइवेसी समझौते का उल्लंघन है।”
उन्होंने कहा, "मैंने आपसे (ओला इलेक्ट्रिक से) ट्वीट के जरिए स्पष्ट रूप से केवल ईमेल के जरिए डेटा देने का अनुरोध किया था। लेकिन आप मुझे ईमेल के जरिए इसे प्रदान करने में विफल रहे और इसकी जगह आपने मेरा डेटा सार्वजनिक रूप से शेयर करना चुना। साथ ही डेटा को मेरी मौजूदगी में नहीं निकाला गया, जिससे मैं आपके दावों की सत्यता पर सवाल उठाता हूं।"
रीतम सिंह उस रात को याद करते हुए कहते हैं, "उस रात ब्रेक मारने के बाद जो हुआ उसे याद करते हुए रीतम सिंह ने कहा: “जब स्पीड बढ़ी और स्कूटर बम्पर के ऊपर चला गया, तो वह कुछ सेकंड के लिए हवा में उड़ गया। जमीन से टकराते ही बाइक पलट गई। इसके बाद यह एक डिवाइडर पर रुकने से पहले 20-30 मीटर तक फिसला।"
रीतम सिंह की इस हादसे में बायां हाथ टूट गया और उनके दाहिने हाथ पर 16 टांके लगे। इसके बाद रीतम सिंह और ओला इलेक्ट्रिक के बीच उस रात असल में क्या हुआ था, इसे लेकर विवाद शुरू हो गया।
हादसे के कुछ हफ्तों के बाद बलवंत सिंह ने इलेक्ट्रिक स्कूटर की सुरक्षा की कमी और दुर्घटना के बाद कंपनी की प्रतिक्रिया पर अपनी चिंताओं को जाहिर करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि ओला इलेक्ट्रिक के एक एग्जिक्यूटिव ने 11 अप्रैल को उनसे संपर्क किया था, जब उन्होंने वाहन में खराब ब्रेक की शिकायत की थी।
उन्होंने बताया, "11 अप्रैल को कंपनी के लोग स्कूटर लेकर चले गए और वह अगले 10 दिनों तक उनके वर्कशॉप में ही रहा। न तो हमें वहां एक भी बार बुलाया गया और न ही उन्होंने यह बताया कि स्कूटर में उन्होंने क्या जांच की है।" उन्होंने बताया कि ओला इलेक्ट्रिक ने 21 अप्रैल को वाहन उन्हें वापस किया।
रीतम सिंह ने बताया, "जब मैंने उनसे रसीद दिखाने को कहा कि उन्होंने गाड़ी में क्या-क्या मरम्मत किया है, तब उन्होंने मुझे बताया कि इसके थ्रॉटल और ब्रेक बदल दिए गए हैं। इसके बाद मैंने इन्हें औपचारिक रूप से ईमेल पर जांच रिपोर्ट भेजने को कहा। इस पर ओला इलेक्ट्रिक के प्रतिनिधि ने कहा कि यह ओला का मालिकाना डेटा है और इसे साझा नहीं किया जा सकता है।"
बाद में ओला ने इस मामले में ट्विटर पर एक बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया, जिसे लेकर लोगों की तरफ से मिली जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ओला इलेक्ट्रिक ने बयान में कहा कि उसने दुर्घटना की पूरी जांच की थी और वाहन में कुछ भी गलत नहीं था।
कंपनी ने स्कूटर की स्पीड का डेटा साझा करते हुए कहा, "डेटा से साफ पता चलता है कि स्कूटर को अधिक स्पीड में चलाया जा रहा था और इस पर सवार व्यक्ति ने घबराहट में ब्रेक लगा दिया, जिससे वाहन से उसका नियंत्रण खो गया।"
ओला इलेक्ट्रिक अपने क्लाउड में वास्तविक समय में स्कूटर्स के सेंसर डेटा को ट्रैक करती है। कंपनी ने दुर्घटना से पहले के 30 मिनट का डेटा साझा करते हुए बताया कि सवार ने हाइपर मोड में सवारी कर रहा था। वह 115 से 95 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से स्कूटर चला था। हादसे के ठीक पहले उसने तीनों ब्रेक को एक साथ लगाया और स्कूटर की स्पीड को तीन सेकेंड में 80 से 0 किमी प्रति घंटे तक नीचे लाया गया। ओला इलेक्ट्रिक ने कहा कि ब्रेक लगाने के बाद अचानक स्कूटर की स्पीड नहीं बढ़ी थी। हालांकि, रीतम सिंह इस डेटा से सहमत नहीं हैं।
रीतम सिंह ने कहा, "इन डेटा का कोई मतलब नहीं है। मेरा दावा है कि मैं 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहा था और जब मैंने ब्रेक लगाया, तो स्पीड 60 किमी प्रति घंटे से बढ़कर 85 किमी प्रति घंटे हो गई और फिर कम हो गई। ग्राफ में कंपनी ने दिखाया है कि स्कूटर की स्पीड तीन सेकेंड में 85 किलोमीटर प्रति घंटे से 0 किलोमीटर प्रति घंटे पर आ गई। यह कैसे संभव है? ऐसी स्पीड ब्रेकिंग तो स्पोर्ट्स कार में ही शायद मिले। और अगर अगर स्कूटर तीन सेकंड में 85 से 0 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर आ होता तो क्या मैं जिंदा होता?"
गोपनीयता बनाम पारदर्शिता
कई लोगों ने ओला इलेक्ट्रिक के जवाब की सराहना की और और कुछ चीजों को साबिक करने के लिए डेटा ट्रैकिंग के इस्तेमाल की सराहना की। वहीं कई लोगों ने इस मामले में प्राइवेसी को लेकर चिंता जाहिर की है। वैसे बता दें कि सभी इलेक्ट्रिव वाहन सहित सभी कनेक्टेड गाड़ियां यूजर्स का डेटा इकठ्ठा करती हैं और ओला इलेक्ट्रिक इस मामले में अपवाद नहीं है। हालांकि, कई ग्राहकों को इसकी जानकारी नहीं होती है।