तेल की कीमतें बढ़ने से पेंट कंपनियों के कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी होने की संभावना है। दरअसल, सप्लाई में कमी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा रेट हाइक में ब्रेक लगने की उम्मीदों के बीच तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। पिछले कुछ समय से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले सत्र में ब्रेंट क्रूड ऑयल तीन महीने के उच्चतम स्तर 81.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। लीबिया और नाइजीरिया से जुड़े मामलों के कारण आपूर्ति में कमी की चिंताओं के चलते तेल की कीमतों में तेजी देखी गई।
जुलाई में 8 फीसदी बढ़ चुकी हैं तेल की कीमतें
उम्मीद की जा रही है कि यूएस फेड अपने रेट हाइक कैंपेन को खत्म कर सकता है। अमेरिकी डॉलर में गिरावट से भी इस सेंटीमेंट को मदद मिली है। इसके अलावा, ऑयल एक्सपोर्ट करने वाले दिग्गज देश सऊदी अरब और रूस ने हाल ही में अपने मौजूदा ऑयल प्रोडक्शन में कटौती करने का फैसला किया है, जो पिछले साल नवंबर से प्रभावी है। इन वजहों के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें जुलाई में अब तक 8 फीसदी बढ़ चुकी है।
क्रूड बेस्ड डेरेवेटिव पर निर्भर है पेंट का प्रोडक्शन
पेंट का प्रोडक्शन काफी हद तक क्रूड बेस्ड डेरेवेटिव पर निर्भर करता है, जिसका इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में किया जाता है। इस तरह मैन्युफैक्चरिंग की लागत कच्चे तेल की कीमत से सीधे प्रभावित होती है। एनालिस्ट्स के मुताबिक कच्चे तेल के डेरिवेटिव पर पेंट कंपनियों की निर्भरता इतनी है कि यह उनके कुल कच्चे माल का लगभग 40 फीसदी है।
पेंट कंपनियों पर दबाव की ये है वजह
जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे पेंट कंपनियों की इनपुट कॉस्ट भी बढ़ जाती है, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ता है। इसलिए, तेल की कीमतों में वृद्धि से पेंट निर्माताओं के मुनाफे पर असर पड़ता है। इस बीच, ज्यादातर ब्रोकरेज कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही में इनपुट कॉस्ट में कमी के कारण पेंट कंपनियों के मार्जिन में रिकवरी की उम्मीद कर रही हैं। हालांकि, आने वाली तिमाहियों में अगर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो इस रिकवरी में यू-टर्न देखने को मिल सकता है। बता दें कि यह डेकोरेटिव पेंट के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है।