रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कर्मचारियों के एक यूनियन ने वेतन मुद्दे का समाधान न होने पर एक साथ आंदोलन पर जाने की चेतावनी दी। आंदोलन की योजना में RBI कर्मचारियों का 30 नवंबर को एक साथ कैजुअल लीव (सामूहिक अवकाश) पर जाना भी शामिल है। यूनाइटेड फोरम ऑफ रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एंड एंप्लॉयीज ने वेतन समझौते के मुद्दे के तत्काल समाधान की मांग की है।
मनीकंट्रोल ने 21 अक्टूबर की एक रिपोर्ट में सबसे पहले बताया था कि RBI के कर्मचारी वेतन मुद्दे को लेकर आंदोलन पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
यूनाइटेड फोरम के पदाधिकारियों ने आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास को 12 नवंबर को लिखे एक लेटर में कहा, "हमारा धैर्य कमजोर हो रहा है, आप भी इस बात को स्वीकारेंगे। हमारे सदस्य बहुत बेचैन हैं और अत्यधिक उत्तेजित मूड में हैं।"
लेटर में आगे लिखा गया है, "ऐसे में हम उनके मान्यता प्राप्त प्रतिनिधी के रूप में, अपने सदस्यों को बुलाने, इकठ्ठा करने के बाध्य हैं, जिससे वे अपनी शिकायतों को अनुशासित तरीके से व्यक्त कर सकें। इसमें काम ठप कर एक साथ कैजुअल लीव पर जाना भी शामिल है। इस कदम को हमने ईमानदारी से टालने की कोशिश की लेकिन इतने संवेदनशील मामले में बैंक की ओर से असाधारण देरी हमें मजबूर करती है।"
आरबीआई कर्मचारियों की सैलरी हर पांच साल में मैनेजमेंट और कर्मचारी यूनियन्स के बीच बातचीत में हुए समझौते के जरिए तय की जाती है। कर्मचारियों की सैलरी में संशोधन का मौजूदा दौर नवंबर 2017 से लंबित है। बता दें कि आरबीआई के निचले स्तर के कर्मचारियों (मुख्य रूप से कक्षा 3 और 4 के कर्मचारी) और अधिकारियों के लिए अलग-अलग यूनियन हैं।
वेतन समझौता आरबीआई में काम करने वाले सभी कर्मचारियों पर लागू होता है। हालांकि अधिकारियों को आमतौर पर निचले स्तर के कर्मचारियों की तुलना में थोड़ा अधिक संशोधन मिलता है। भारतीय रिजर्व बैंक में लगभग 12,500-13,000 कर्मचारी हैं।
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