RBI ने सोना खरीदना किया कम, 8 साल के सबसे निचले स्तर पर आई खरीदारी; जानिए वजह
2025 में RBI की सोने की खरीद 8 साल के निचले स्तर पर आ गई है। World Gold Council के मुताबिक, ऊंची गोल्ड कीमतें और फॉरेक्स रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ने के चलते RBI ने खरीद की रफ्तार धीमी की है।
2022 से अब तक सोने की कीमतों में करीब 175% की तेजी आ चुकी है।
2025 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सोने की खरीद पिछले आठ साल में सबसे कम रही। World Gold Council (WGC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने पूरे 2025 में सिर्फ 4.02 टन सोना खरीदा। इसके मुकाबले 2024 में RBI ने 72.6 टन सोना खरीदा था। यानी सालाना आधार पर सोने की खरीद में करीब 94% की भारी गिरावट आई है।
भले ही 2025 में नई खरीद काफी कम रही हो, लेकिन RBI के कुल गोल्ड रिजर्व अब भी रिकॉर्ड स्तर पर हैं। RBI के पास कुल 880.2 टन सोना जमा है। 2024 के अंत में यह आंकड़ा 876.18 टन था। यानी खरीद की रफ्तार धीमी होने के बावजूद कुल होल्डिंग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।
फॉरेक्स रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा
RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी भी अब ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई है। नवंबर 2025 तक RBI के गोल्ड आधारित फॉरेक्स रिजर्व की वैल्यू $100 अरब से ज्यादा हो चुकी है।
2024 में हुई भारी खरीद और 2025 में सोने की कीमतों में तेज उछाल की वजह से, फॉरेक्स रिजर्व में सोने का हिस्सा करीब 10% से बढ़कर सीधे 16% तक पहुंच गया।
RBI ने सोने की खरीद धीमी क्यों की
World Gold Council का मानना है कि फॉरेक्स रिजर्व में सोने का हिस्सा तेजी से बढ़ने के कारण RBI ने नई खरीद पर ब्रेक लगाया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची गोल्ड कीमतें और कुल रिजर्व में सोने का बढ़ता वजन, RBI के ज्यादा संतुलित और सोच-समझकर किए गए रिजर्व मैनेजमेंट की ओर इशारा करता है।
RBI के अपने आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2021 में भारत के फॉरेक्स रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी (डॉलर वैल्यू में) सिर्फ 5.87% थी। लेकिन अगले पांच साल में यह हिस्सा बढ़कर 16% तक पहुंच गया। यानी RBI ने धीरे-धीरे अपने रिजर्व पोर्टफोलियो में सोने की भूमिका को काफी मजबूत किया है।
RBI का सारा सोना भारत में नहीं रखा जाता
RBI का पूरा गोल्ड रिजर्व देश के अंदर ही नहीं रखा जाता। RBI की Half Yearly Report on Management of Foreign Exchange Reserves के मुताबिक मार्च 2025 तक RBI के पास कुल 879.59 मीट्रिक टन सोना था।
इसमें से 511.99 मीट्रिक टन सोना भारत में रखा गया था। वहीं, 348.62 मीट्रिक टन सोना Bank of England और Bank for International Settlements (BIS) के पास सुरक्षित कस्टडी में रखा गया था। इसके अलावा 18.98 मीट्रिक टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में रखा गया था।
सेंट्रल बैंकों का सोने पर बढ़ा भरोसा
दिसंबर 2025 तक दुनिया के सेंट्रल बैंकों के पास कुल 32,140 टन सोना जमा था। सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीद 2022 से तेज हुई थी।
WGC के मुताबिक, 2022 में सेंट्रल बैंकों ने 1,082 टन, 2023 में 1,037 टन और 2024 में रिकॉर्ड 1,180 टन सोना खरीदा। 2025 में भी यह आंकड़ा 1,000 टन से ऊपर रहने की उम्मीद है।
डॉलर के बाद गोल्ड दूसरा सबसे अहम रिजर्व एसेट
अब सेंट्रल बैंकों के फॉरेक्स रिजर्व में 20% हिस्सेदारी के साथ सोना, डॉलर के बाद दूसरा सबसे अहम एसेट बन गया है। डॉलर की हिस्सेदारी करीब 46% है, जबकि यूरो 16% पर आ गया है।
एक अहम बदलाव यह भी है कि 1996 के बाद पहली बार सेंट्रल बैंकों के फॉरेक्स रिजर्व में मौजूद सोने की मात्रा, US ट्रेजरी बॉन्ड्स से ज्यादा हो गई है। हालांकि 2025 की पहली दो तिमाहियों में सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीद में थोड़ी नरमी दिखी। पहली तिमाही में 244 टन और दूसरी तिमाही में 166 टन सोना खरीदा गया।
सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी
2022 से अब तक सोने की कीमतों में करीब 175% की तेजी आ चुकी है। इसकी बड़ी वजह सेंट्रल बैंकों की भारी खरीद और वैश्विक अनिश्चितताएं रही हैं। सिर्फ 2025 में ही सोने की कीमतें 65% से ज्यादा बढ़ीं। क्योंकि वैश्विक अस्थिरता के चलते निवेशकों का झुकाव तेजी से गोल्ड की ओर बढ़ा।