RBI का बिग प्लान, मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए होगी ₹1 लाख करोड़ की खरीदारी

लंबे समय से जिस पल का इंतजार किया जा रहा था, वह आखिरकार आज आ ही गया और RBI ने रेपो रेट में कमी करके आम लोगों को लोन की किश्तें कम करने का रास्ता साफ कर दिया। साथ ही आरबीआई ने लिक्विडिटी बढ़ाने को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। इसके तहत आरबीआई ने बताया कि दिसंबर में क्या कदम उठाए जाएंगे, जानिए यह कैसे होगा?

अपडेटेड Dec 05, 2025 पर 11:08 AM
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घरेलू बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंक RBI ने बड़ा ऐलान किया है।

घरेलू बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंक RBI ने बड़ा ऐलान किया है। आरबीआई का कहना है कि ₹1 लाख करोड़ की ओपन मार्केट ट्रांजैक्शंस (OMO) खरीदारी के जरिए मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाया जाएगा।  साथ ही आरबीआई ने इस महीने दिसंबर में $500 करोड़ के त्रिवर्षीय अमेरिकी डॉलर/भारतीय रुपये के जरिए भी लिक्विडिटी को बढ़ाएगा। बता दें कि आज आरबीआई ने इस साल 2025 की आखिरी मौद्रिक नीतियों का ऐलान कर दिया। केंद्रीय बैंक की मौद्रित नीतियों की कमेटी (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी 0.25% पर्सेंटेज प्वाइंट्स की कटौती का फैसला किया है। रेपो रेट अब कम होकर 5.25% पर आ गई है।

इस साल चार बार हुई Repo Rate में कटौती

इस साल 2025 और पिछले वित्त वर्ष 2025 की आखिरी एमपीसी (मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी) बैठक में जोकि फरवरी में हुई थी, उसमें आरबीआई ने 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती का फैसला किया था। इसके बाद दो और बार में अप्रैल और जून में आरबीआई ने 25-25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की। फिर दो बार आरबीआई ने इसकी दरें स्थिर रखी और अब आज 5 दिसंबर को आरबीआई ने फिर रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती का ऐलान किया है। बता दें कि रेपो रेट को लेकर एमपीसी की बैठक हर दो महीने पर होती है।


रेपो रेट में कटौती पर ईएमआई सस्ता होने की बढ़ी संभावना

आरबीआई के रेपो रेट में कटौती के फैसले से लोन की किश्तें कम होने की संभावना बढ़ गई हैं। यह वह रेट है, जिस पर बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं। अब रेपो रेट कम होने पर बैंकों के लिए आरबीआई से कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा तो इसका फायदा बैंक आम लोगों तक भी पहुंचाते हैं तो उनके लोन की किश्तें हल्की हो सकती हैं। हालांकि दूसरी तरफ रेपो रेट कम होने पर एफडी पर ब्याज दरें भी कम हो सकती हैं। इसकी वजह ये है कि रेपो रेट घटने से बैंकों को लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए एफडी को आकर्षक बनाने की जरूरत नहीं रहती।

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