रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के पूर्वी यूक्रेन के दो इलाकों डोनेट्स्क (Donetsk) और लुहान्स्की (Luhansk) को अलग देश के रूप में मान्यता देने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने जवाबी कार्रवाई की है। पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि, ये बहुत ज्यादा सख्त नहीं हैं। माना जा रहा है कि यह सिर्फ रूस को एक संकेत है कि वह यूक्रेन के खिलाफ मनमानी न करे। उसके नहीं मानने पर पश्चिमी देशों ने सख्त प्रतिबंधों का विकल्प खुला रखा है।
जर्मनी ने नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। उसने मंगलवार को इसका ऐलान किया। इसे रूस के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका और यूरोप ने भी रूस पर सीमित प्रतिबंध लगाए हैं। जानकारों का मानना है कि पश्चिमी देश अभी 'इंतजार करो और देखो' की पॉलिसी अपनाना चाहते हैं। आइए जानते हैं पश्चिमी देशों ने रूस पर क्या-क्या प्रतिबंध लगाए हैं और उनका क्या मतलब है।
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि वह रूस के खिलाफ शुरुआती प्रतिबंध लगा रहा है। सोमवार को व्हाइट हाउस ने यूक्रेन के उन इलाकों के खिलाफ प्रतिबंध का ऐलान किया, जिन्हें पुतिन ने स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी है। लेकिन, ये प्रतिबंध ज्यादातर सांकेतिक हैं। इनका रूस की अर्थव्यवस्था पर खास असर नहीं पड़ेगा। अमेरिका ने रूस के दो वित्तीय संस्थानों-वीईबी और मिलिट्री बैंक पर भी बैन लगाया है। रूस के सॉवरेन डेट पर भी रोक लगाई गई है।
अमेरिकी सरकार के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जो फाइनर ने कहा है कि अगर रूस यूक्रेन के खिलाफ और कोई कदम बढ़ाता है तो हम भी बड़े कदम उठाने के लिए तैयार हैं। ये ज्यादा सख्त होंगे। माना जा रहा है कि अब तक अमेरिका ने रूस के सबसे बड़े बैंक पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। इसलिए फिलहाल फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के मामले में रूस को कोई बड़ी समस्या नहीं होने वाली है। अगर आगे अमेरिका रूस के सबसे बड़े बैंक पर प्रतिबंध लगाता है तो फिर रूस को मुश्किल हो सकती है।
जर्मनी ने मंगलवार को नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन के सर्टिफिकेशन पर रोक लगा दी। इससे संकेत मिलता है कि यूरोप रूस की विशाल एनर्जी इंडस्ट्री को टारगेट करना चाहता है। हालांकि, इससे यूरोप को नुकसान होगा, क्योंकि यूरोपीय देशों में नेचुरल गैस की कीमतें बढ़ेंगी। पहले से ही यूरोप में एनर्जी की कीमतें बहुत बढ़ चुकी हैं।
क्या है नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन?
नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन की लंबाई 750 मील है। यह पिछले साल सितंबर में बनकर तैयार हुई थी। अभी तक जर्मनी के एनर्जी रेगुलेटर्स से इसे प्रमाणपत्र नहीं मिला है। प्रमाणपत्र के बगैर इस पाइपलाइन का इस्तेमाल नहीं हो सकता। इससे रूस से जर्मनी को बाल्टिक सी पाइपलाइन के जरिए गैस की सप्लाई नहीं हो सकती।
नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन सालाना 55 अरब घन मीटर गैस की आपूर्ति कर सकता है। यह जर्मनी की कुल सालाना खपत के 50 फीसदी से ज्यादा है। 55 अरब घन मीटर गैस की कीमत 15 अरब डॉलर होगी। इस पाइपलाइन पर रूस की एनर्जी कंपनी गजप्रोम का नियंत्रण है। यह सरकारी कंपनी है। मंगलवार को इंग्लैंड के प्राइम मिनिस्टर बोरिस जॉनसन ने कहा, "मैं नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन पर रोक लगाने के लिए रूस के चांसलर ओलाफ शोल्ज को सैल्यूट करता हूं। मेरा मानना है कि यह साहसिक कदम है।"
हालांकि, माना जा रहा है कि रूस के खिलाफ यूरोपीय यूनियन का ट्रंप कार्ड SWIFT हो सकता है। यह ग्लोबल मैसेजिंग सर्विस है, जिसका इस्तेमाल बैंक्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस करते हैं। अगर रूस को SWIFT से हटाया जाता है तो फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के लिए रूस के अंदर और बाहर पैसे भेजना मुश्किल हो जाएगा। इससे सबसे ज्यादा नुकसान रूस की कंपनियों और उनके विदेशी ग्राहकों को होगा।
स्विफ्ट का केंद्र बेल्जियम में है। इसका नियंत्रण एक बोर्ड के हाथ में है, जिसमें 25 लोग शामिल हैं। इसे बेल्जियम के कानून के तहत बनाया गया है। इस पर यूरोपीय यूनियन के रेगुलेशंस लागू होते हैं। यह खुद को 'न्यूट्रल यूटिलिटी' के रूप में पेश करता है।
उधर, इंग्लैंड ने भी रूस के पांच बैंकों और वहां के अमीर लोगों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। जिन बैंकों पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें रोसिया बैंक, आईएस बैंक, जनरल बैंक, प्रोमस्वाजबैंक और ब्लैक सी बैंक शामिल हैं। ब्रिटेन ने रूस के तीन सबसे अमीर लोगों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है।