Vivo, Oppo और Xiaomi पर लगा ₹6,000 करोड़ के फंड डायवर्जन का आरोप, सरकार ने SFIO को सौंपी जांच

चीन की स्मॉर्टफोन कंपनियों वीवो (Vivo), ओपो (Oppo) और शाओमी (Xiaomi) की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) की एक रिपोर्ट में इन तीनों कंपनियों पर 6,000 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन का आरोप लगाया गया है। अब कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने इस मामले की जांच का जिम्मा सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को सौंप दिया है

अपडेटेड Aug 13, 2025 पर 2:06 PM
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सूत्रों ने बताया कि RoC ने कई महीनों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की

चीन की स्मॉर्टफोन कंपनियों वीवो (Vivo), ओपो (Oppo) और शाओमी (Xiaomi) की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) की एक रिपोर्ट में इन तीनों कंपनियों पर 6,000 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन का आरोप लगाया गया है। अब कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने इस मामले की जांच का जिम्मा सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को सौंप दिया है। इस मामले से वाकिफ दो सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी है।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया, “SFIO फिलहाल वीवो की जांच कर रहा है। शाओमी और ओपो के मामलों को भी SFIO को सौंप दिया गया है। RoC के रिपोर्ट में फंड डायवर्जन के आरोप लगे हैं। जांच पूरी होने के बाद SFIO अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा।” सूत्रों के मुताबिक, SFIO की यह जांच मार्च 2025 में शुरू हुई थी और इसे पूरा होने में लगभग एक साल का समय लग सकता है।

रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) की रिपोर्ट में कहा गया है कि तीनों स्मार्टफोन कंपनियों ने मिलकर लगभग 6,000 करोड़ रुपये का फंड डायवर्ट किया। इस रिपोर्ट के आधार पर कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने SFIO को विस्तृत जांच के निर्देश दिए है।


जांच पूरी होने पर SFIO की रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी जाएगी। SFIO के पास कंपनियों, उसके डायरेक्टरों और उससे जुड़ी इकाइयों के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में कानूनी कार्रवाई शुरू करने का अधिकार है। शाओमी, वीवो और ओपो ने खबर लिखे जाने तक मनीकंट्रोल के ईमेल से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया है।

टैक्स और वित्तीय लेनदेन की जांच भी

सूत्रों ने बताया कि RoC ने कई महीनों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की। इसमें फंड डायवर्जन के अलावा संभावित टैक्स चोरी और संबधित इकाइयों के साथ वित्तीय लेनदेन की जांच की सिफारिश की गई। इस रिपोर्ट को सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) और सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) के साथ भी साझा किया गया है।

MCA ने RoC की सिफारिशों के आधार पर मामले को इसकी गंभीरता और पैमाने को देखते हुए SFIO को सौंप दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हो रही है जब भारत में चाइनीज कंपनियों के वित्तीय लेनदेन पर निगरानी कड़ी की जा रही है।

SFIO की भूमिका

सीरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO), कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाली एक स्पेशल एजेंसी है। यह बड़े और जटिल कॉरपोरेट धोखाधड़ी मामलों की जांच करती है। इसे अक्सर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज या दूसरी नियामकीय संस्थाओं की रिपोर्ट के आधार पर मामले सौंपे जाते हैं। जांच में कंपनी के रिकॉर्ड, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन की गहन पड़ताल और डायरेक्टरों और सीनियर अधिकारियों से पूछताछ शामिल होती है।

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