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Tata की iPhone फैक्ट्री बंद तो नहीं हो जाएगी! जमीन का पानी दूषित होने का मामला, प्रदूषण बोर्ड के तेवर कड़े

प्लांट के पास खेती करने वाले लोगों ने महीनों तक तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की कि फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी उनकी जमीन और खुले कुओं को दूषित कर रहा है। प्रदूषण बोर्ड ने Tata Electronics से पूछा है कि नियमों के कथित उल्लंघन के लिए यूनिट की बिजली क्यों न काटी जाए और यूनिट को क्यों न बंद किया जाए

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jun 14, 2026 पर 4:29 PM
Tata की iPhone फैक्ट्री बंद तो नहीं हो जाएगी! जमीन का पानी दूषित होने का मामला, प्रदूषण बोर्ड के तेवर कड़े
Tata Electronics ताइवान की फॉक्सकॉन के बाद दक्षिण एशिया में एपल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर है।

Apple iPhone के पार्ट्स बनाने वाली Tata की तमिलनाडु की फैक्ट्री पर संकट के बादल छा गए हैं। भारत के एक प्रदूषण नियामक ने आरोप लगाया है कि इस फैक्ट्री से निकले गंदे पानी ने आस-पास के खेतों के भू-जल (ग्राउंडवॉटर) को दूषित कर दिया है। रेगुलेटर ने चेतावनी दी है कि अगर टाटा ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो फैक्ट्री को जबरन बंद कर दिया जाएगा। यह जानकारी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट से सामने आई है।

टाटा ग्रुप की Tata Electronics ताइवान की फॉक्सकॉन के बाद दक्षिण एशिया में एपल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर है। जांच के दायरे में आया Tata का iPhone प्लांट तमिलनाडु के होसुर में है। यहां iPhone के लिए बैक पैनल और दूसरे पार्ट्स बनाए जाते हैं। प्लांट के पास खेती करने वाले लोगों ने महीनों तक तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की कि फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी उनकी जमीन और खुले कुओं को दूषित कर रहा है।

फिर राज्य ने 5 बार कराया निरीक्षण

रिपोर्ट के मुताबिक, 25 मई के रेगुलेटरी नोटिस में कहा गया है कि इन शिकायतों के बाद दिसंबर 2025 और मई 2026 के बीच राज्य की ओर से 5 बार निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपनी फैसिलिटी के अंदर बने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग तालाब में गंदा पानी छोड़ा था। तालाब के ओवरफ्लो होने से आस-पास की कृषि भूमि में स्थित खुले कुओं का भू-जल दूषित हो गया। तीन पेज के नोटिस में कहा गया है कि प्रदूषण बोर्ड ने 23 दिसंबर, 2025 को भी एक लेटर जारी किया था। इसमें दिए गए निर्देशों पर कंपनी ने कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की। मई के नोटिस में प्रदूषण बोर्ड ने Tata Electronics से पूछा है कि नियमों के कथित उल्लंघन के लिए यूनिट की बिजली क्यों न काटी जाए और यूनिट को क्यों न बंद किया जाए।

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