Silver Outlook: 'चांदी में ये तेजी तो बस शुरुआत है'... वेदांता के अनिल अग्रवाल ने क्यों कही ये बात

Silver Outlook: वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल का कहना है कि चांदी में आई तेजी अभी शुरुआती दौर में है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में चांदी और भी ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। जानिए क्या है इसकी वजह।

अपडेटेड Dec 24, 2025 पर 3:49 PM
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Vedanta भारत में अपनी सब्सिडियरी Hindustan Zinc के जरिए चांदी का सबसे बड़ा उत्पादक है।

Silver Outlook: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) का कहना है कि चांदी की कीमतों में आई तेज तेजी अभी शुरुआती दौर में है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि 2025 में अब तक डॉलर के लिहाज से चांदी करीब 125 प्रतिशत बढ़ चुकी है। इसी अवधि में गोल्ड में करीब 63 प्रतिशत की तेजी रही है।

अग्रवाल के मुताबिक, यह दिखाता है कि कीमती धातुओं में चांदी की भूमिका तेजी से बदल रही है। चांदी का भाव बुधवार दोपहर 3.30 बजे तक 1.82% तक 2.23 लाख रुपये प्रति किलो पर था।

प्रेशियस मेटल के साथ मजबूत इंडस्ट्रियल मांग


अनिल अग्रवाल के मुताबिक, चांदी अब सिर्फ निवेश या गहनों तक सीमित नहीं है। यह एक प्रेशियस मेटल होने के साथ-साथ अहम इंडस्ट्रियल मेटल भी बन चुकी है। यही ड्यूल डिमांड प्रोफाइल यानी निवेश और उद्योग चांदी की मौजूदा तेजी की बड़ी वजह है।

सोलर, डिफेंस और नई टेक्नोलॉजी से बढ़ी खपत

उन्होंने बताया कि सोलर एनर्जी, डिफेंस और उभरती टेक्नोलॉजी में चांदी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक निवेश बढ़ने से चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड को मजबूत सपोर्ट मिला है। इससे इसकी मांग सिर्फ ज्वेलरी और निवेश तक सीमित नहीं रह गई।

सप्लाई सीमित, इसलिए कीमतों को सहारा

चांदी की सप्लाई भी कीमतों को सपोर्ट दे रही है। अग्रवाल के मुताबिक, चांदी का ज्यादातर उत्पादन जिंक और लेड की माइनिंग के दौरान बाय-प्रोडक्ट के रूप में होता है। इसलिए मांग बढ़ने पर सप्लाई तुरंत बढ़ा पाना मुश्किल होता है। यही वजह है कि डिमांड-सप्लाई का संतुलन फिलहाल चांदी के पक्ष में है।

ऑल-टाइम हाई के आसपास भी मजबूती

इस समय चांदी ग्लोबल और घरेलू दोनों बाजारों में ऑल-टाइम हाई स्तरों के आसपास ट्रेड कर रही है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, सुरक्षित निवेश की तलाश और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मॉनिटरी ईजिंग की उम्मीदों ने भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाई है।

वेदांता का चांदी से जुड़ाव

Vedanta भारत में अपनी सब्सिडियरी Hindustan Zinc के जरिए चांदी का सबसे बड़ा उत्पादक है, जहां चांदी जिंक और लेड ऑपरेशंस के दौरान बाय-प्रोडक्ट के रूप में निकाली जाती है। हालांकि, अग्रवाल ने अपनी टिप्पणी में कंपनी के वित्तीय नतीजों का जिक्र नहीं किया और फोकस बाजार के व्यापक रुझानों पर रखा।

‘चांदी की कहानी अभी शुरू हुई है’

अनिल अग्रवाल का मानना है कि मौजूदा तेजी शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल डिमांड फैक्टर्स से आई है। उनके शब्दों में, 'चांदी की कहानी अभी शुरू ही हुई है।' हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि कमोडिटी बाजार स्वभाव से अस्थिर होता है, इसलिए निवेशकों को जोखिम समझकर ही फैसले लेने चाहिए।

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