साल 2025 में भारत में कई नए स्टार्टअप शुरू हुए। लेकिन साथ ही कुछ पुराने स्टार्टअप बंद भी हुए। जैसा कि उम्मीद की जा सकती है, इस साल बंद होने वाले लगभग सभी स्टार्टअप्स के पीछे कैपिटल की कमी ने एक बड़ी भूमिका निभाई। फंड जुटाने की कई कोशिशें हुईं लेकिन नाकामी हाथ लगने के बाद आखिरकार ऑपरेशंस बंद करने पड़े। 2025 में कौन से प्रमुख स्टार्टअप इतिहास बन गए, आइए जानते हैं...
2019 में शुरू हुई ब्लूस्मार्ट ने भारत में कैब सर्विसेज में ओला और उबर को चुनौती देने का फैसला किया। इसने बिना प्रदूषण वाली राइड और सैलरी वाले ड्राइवरों का वादा किया था। स्टार्टअप को BP वेंचर्स समेत कई दिग्गज निवेशकों से फंडिंग मिली, जो कि लगभग 16.8 करोड़ डॉलर की थी। ब्लूस्मार्ट को जेनसोल इंजीनियरिंग के प्रमोटर्स ने शुरू किया था। जेनसोल में जब बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी सामने आई तो ब्लूस्मार्ट को भी नुकसान हुआ। हालांकि जेनसोल के पास ब्लूस्मार्ट में कोई इक्विटी नहीं थी, लेकिन उसके पास ब्लूस्मार्ट के EV फ्लीट का एक बड़ा हिस्सा था।
SEBI ने जेनसोल इंजीनियरिंग पर पैसों को डायवर्ट करने, कर्ज का गलत इस्तेमाल करने और संबंधित पक्षों के माध्यम से अपने स्टॉक में ट्रेड को फाइनेंस करने का आरोप लगाया। जेनसोल पर आरोप है कि उसने EV खरीद के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डायवर्ट की। कंपनी के प्रमोटर्स अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी ने ब्लूस्मार्ट के लिए नए EV खरीदने के लिए लिए गए लोन को अपने निजी हित के लिए इस्तेमाल किया, जैसे कि गुरुग्राम में लग्जरी अपार्टमेंट की खरीद।
धोखाधड़ी के खुलासे के बाद ब्लूस्मार्ट के अंदरूनी तनाव सामने आने लगे जैसे कि सैलरी में देरी, रोजाना की राइड में भारी गिरावट, और सीनियर लीडरशिप का कंपनी छोड़ना। कंपनी ने आखिरकार ऑपरेशंस बंद कर दिए।
इसे टेलीकॉम टाइकून सुनील भारती मित्तल के बेटे केविन मित्तल ने 2012 में शुरू किया था। कभी यह WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ग्लोबल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को टक्कर देने वाला लगता था। लॉन्च के 4 साल के अंदर ही इसने टाइगर ग्लोबल, सॉफ्टबैंक और टेनसेंट जैसी वेंचर कैपिटल फर्म्स से 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा जुटाए। कॉम्पिटीशन गहराने पर 2021 में इसकी मैसेजिंग सर्विस बंद हो गई। फिर कंपनी ने रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म 'रश' पर फोकस किया। लेकिन इस साल रियल-मनी गेमिंग ऐप्स पर पूरी तरह से बैन लगने के बाद हाइक ने सितंबर 2025 में अपने बाकी ऑपरेशंस भी बंद कर दिए।
डंजो भारत में हाइपरलोकल डिलीवरी में सबसे पहले उतरी थी। 2022 में इसने रिलायंस रिटेल से 24 करोड़ डॉलर जुटाए थे। लेकिन जब कॉम्पिटीशन बढ़ा और जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और ब्लिंकइट जैसे दूसरे खिलाड़ी भी मैदान में आ गए तो डंजो इनसे मुकाबला नहीं कर सकी। फिर यह कर्ज के जाल में भी फंस गई। स्टार्टअप्स से इस्तीफे होने लगे। सितंबर 2025 तक इसके एकमात्र को-फाउंडर कबीर बिस्वास ने भी डंजो का साथ छोड़ दिया। इस तरह डंजो की कहानी खत्म हो गई।
ब्लिंकइट के पूर्व चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर वरुण खुराना ने साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान इसे शुरू किया था। यह एक सब्सक्रिप्शन बेस्ड ग्रोसरी डिलीवरी सर्विस थी। ओटिपी ने मुंबई और दिल्ली-NCR में लास्ट-माइल डिलीवरी संभालने वाले रीसेलर्स की एक कम्युनिटी के जरिए कंज्यूमर्स को सीधे किसानों से जोड़ा। लेकिन फिर स्टार्टअप में फंड की तंगी शुरू हो गई। यह 10-मिनट में डिलीवरी मॉडल को नहीं अपना सका। मई 2025 में यह स्टार्टअप बंद हो गया।