भारत सरकार के पास रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स ने देश में अभी तक 6.5 लाख लोगों को नौकरियां दी हैं। डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के सेक्रेटरी अनुराग जैन ने गुरुवार 6 जनवरी को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2016 में केंद्र सरकार ने भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बनाने के लक्ष्य के साथ एक महत्वकांक्षी डिजिटल पहल शुरू की थी।
अनुराग जैन ने बताया कि इस पहल 2016 में शुरू किए जाने के बाद से DPIIT ने अब अब तक 60,000 अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता दे चुका है।
जैन ने बताया, "लगभग प्रत्येक स्टार्टअप ने 11 नौकरियों पैदा की हैं। स्टार्टअप क्रांति से हमारा देश अब नौकरी मांगने वालों की जगह अब नौकरी देने वाले देश में बदल रहा है।" सरकार ने इससे पहले एक फार्मूले से बताया था कि सेक्टर में प्रत्यक्ष तौर पर पैदा हुए प्रत्येक एक नौकरी अप्रत्यक्ष तौर पर तीन लोगों को रोजगार मुहैया कराती है।
जैन ने कहा कि DPIIT अगले 4 सालों यानी 2025 तक आधिकारिक तौर पर 50,000 नए स्टार्टअप को रजिस्टर करके इस क्षेत्र में 20 लाख और नई नौकरियां पैदा करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
स्टार्टअप इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होने से स्टार्टअप को लगातार तीन साल की अवधि के लिए इनकम टैक्स और कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिलता है। साथ ही यह पेटेंट दाखिल करने पर भी चीजों को फास्ट ट्रैक करने और 80 पर्सेंट तक छूट दिलाने में मदद करता है। इसके अलावा यहां रजिस्ट्रेशन पर अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड के जरिए स्टार्टअप में निवेश के लिए फंडिंग की सुविधा भी मिलती है।
जैन ने बताया, "स्टार्टअप मूवमेंट तेजी से बढ़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि सभी रजिस्टर स्टार्टअप में से 45 फीसदी टियर 2 और टियर 3 शहरों से हैं। साथ ही 45 फीसदी स्टार्टअप की कमान महिला उद्यमियों के हाथों में हैं। ये बड़ी सफलता की कहानियां हैं।" उन्होंने बताया कि देश के कुल 736 जिलों में से कम से कम 630 जिलों में कोई न कोई स्टार्टअप रजिस्टर है।
2016 में केंद्र सरकार ने स्टार्ट-अप की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए स्मॉल इंडस्ट्रीज डिवेलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) के तहत 10,000 करोड़ रुपये के फंड की स्थापना की थी। जैन ने बताया कि इसमें से 6,500 करोड़ रुपये कमिट किए जा चुके हैं।